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क्रूड का संकट / मोदी सरकार को झटका, घरेलू कच्चे तेल के प्रोडक्शन में रिकॉर्ड गिरावट

ईरान संकट के बीच कम उत्पादन की वजह से अब देश को महंगे कच्चे तेल का करना होगा आयात

Modi government's failure, record decline in domestic crude oil production
  • मोदी सरकार को कच्चे तेल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए तीन बड़ी मुश्किलों से निपटना होगा। 

नई दिल्ली. मोदी सरकार के लिए ईरान संकट के बीच दूसरी निराशाजनक खबर है। अमेरिका के प्रतिबंध के बाद भारत को कच्चे तेल के लिए नए सिरे से इंतजाम करना है तो दूसरी ओर घरेलू मोर्चे पर भी साथ नहीं मिल पा रहा है। देश में क्रूड आयल का उत्पादन बढ़ने की बजाय रिकॉर्ड स्तर पर घट गया है। यानी भारत को अब और ज्यादा तेल का आयात करने के लिए कीमती विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ेगी। जबकि लोगों को भी महंगा ईंधन खरीदना पड़ सकता है। 

 

दो साल से कम हो रहा है उत्पादन 

 

 कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन वित्त वर्ष 2018-19 में लक्ष्य से 7.59 प्रतिशत कम रहा जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में इसमें 4.15 प्रतिशत की गिरावट आई है।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार गत 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में देश में कच्चे तेल का उत्पादन 342.03 लाख टन रहा। इससे पहले के वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 356.84 लाख टन रहा था। सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 में 370.12 लाख टन कच्चा तेल उत्पादन का लक्ष्य रखा था, लेकिन वास्तविक उत्पादन इससे 7.59 प्रतिशत कम रहा। 

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सीएनजी ने भी किया निराश 

 

इस दौरान प्राकृतिक गैस का उत्पादन लक्ष्य से 7.66 प्रतिशत कम रहा, हालांकि वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में इसमें 0.69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में 35,599.17 एमएमएससीएम प्राकृतिक गैस उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था जबकि वास्विक उत्पादन 32,873.37 एमएमएससीएम रहा। इससे पहले के वित्त वर्ष में 32,649.31 एमएमएससीएम प्राकृतिक गैस का उत्पादन हुआ था।  

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मार्च में और ज्यादा हालात बदतर


गत मार्च महीने में कच्चे तेल का उत्पादन लक्ष्य से 12.99 प्रतिशत कम रहा। लक्ष्य 32.80 लाख टन का था जबकि उत्पादन 28.54 लाख टन रहा। यह मार्च 2018 के 30.41 लाख टन के मुकाबले 7.16 प्रतिशत कम है।  मार्च में प्राकृतिक गैस का उत्पादन 2,815.96 एमएमएससीएम रहा जो लक्ष्य से 8.99 प्रतिशत कम है, हालाँकि पिछले साल मार्च के 2,782.61 एमएमएससीएम की तुलना में यह 1.20 प्रतिशत अधिक है। 

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मोदी सरकार के सामने यह तीन बड़ी मुश्किलें 

 

  1. अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत को ईरान से मिलने वाला सस्ते कच्चा तेल का आयात बंद हो जाएगा। 
  2.  सऊदी अरब ने भी तेल उत्पादन बढ़ाने से इंकार कर दिया है। यानी मौजूदा तेल के लिए बाजार में मारामारी मचेगी और तेल के दाम बढ़ जाएंगे।
  3. भारत में कच्चे तेल का उत्पादन कम होने से क्रूड पर निर्भरता बढ़ेगी।

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