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GSTN से सरकार पता करेगी कितनों को मिली नई नौकरी, सर्वे के तरीकों में होंगे बड़े बदलाव

नई नौकरियां पैदा न कर पाने को लेकर आलोचना का सामना कर रही है मोदी सरकार नई नौकरियों का सटीक डाटा कैप्‍चर करने के लिए नए

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नई दिल्‍ली। नई नौकरियां पैदा न कर पाने को लेकर आलोचना का सामना कर रही है मोदी सरकार नई नौकरियों का सटीक डाटा कैप्‍चर करने के लिए नए मकैनिज्‍म पर काम कर रही है। इसके तहत सरकार नई नौकरियों का डाटा जुटाने में जीएसटीएन पोर्टल की मदद लेगी। जीएसटीएन पोर्टल के जरिए सरकार आसानी से पता कर सकेगी कि पोर्टल में किस सेक्‍टर की कितनी कंपनियां रजिस्‍टर्ड है ओर इसके आधार पर लेबर ब्‍यूरो नई नौकरियों का सटीक डाटा जुटा सकेगा जो देश में नई नौकरियों को लेकर सही तस्‍वीर प्रस्‍तुत करेगा। इसके तौर तरीको को अंतिम रूप देने के लिए जल्‍द ही टेक्निकल ग्रुप की बैठक हो सकती है। 

 

जीएसटीएन से कंपनियों का डाटा जुटाएगा लेबर ब्‍यूरो 
 
केंद्रीय श्रम मंत्रालय के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि आने वाले समय में हम जीएसटीएन से कंपनियों का डाटा ले सकते हैं। इससे हम हर सेक्‍टर की कंपनियों का सैंपल ले सकेंगे कि पोर्टल पर इतनी कंपनियां मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की हैं, या ट्रेडिंग सेक्‍टर की हैं या फार्मा सेक्‍टर की है। इससे हमारे लिए सैंपल जुटाना आसान होगा। इसके आधार पर हम कंपनियों से संपर्क कर पता कर सकते हैं कि कंपनी में कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं। इससे यह पता चल सकता कि किसी खास अवधि में कितने लोगों को नई नौकरियां मिलीं। इस तरीके में सैंपल साइज भी बड़ा हो सकता है जिससे नई नौकरियों को लेकर सटीक डाटा सामने आ सकता है। 

 

टेक्निकल ग्रुप तय करेगा सर्वे का तौर तरीका 

 

अधिकारी के मुताबिक जीएसटीन आधारित सर्वे के तौर तरीके क्‍या होंगे इस पर टेक्निकल ग्रुप फैसला करेगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि सैंपल साइज क्‍या होगा। सैंपल साइज को कवर करने के लिए फील्‍ड में कितने स्‍टॉफ की जरूरत होगी और इस पर कितना खर्च आएगा। इन बातों का ध्‍यान रख कर टेक्निकल ग्रुप सर्वे के तौरी तरीको अंतिम रूप देगा। पीएम की टास्‍कफोर्स ने भी नई नौकरियों का डाटा जुटाने के लिए जीएसटीएन का उपयोग करने की सिफारिश की है।  

 

11,000 कंपनियों का है सैंपल साइज 

 

मौजूदा समय में लेबर ब्‍यूरो नौकरियों को लेकर जो सर्वे करता है उसके लिए सैंपल साइज लगभग 11,000 कंपनियों का है। देश भर में लेबर ब्‍यूरो के 150 से 200 कर्मचारी फील्‍ड में जाकर इन कंपनियों से नौकरियों के बारे में डाटा जुटाते हैं। अधिकारी के मुताबिक सर्वे के मौजूदा तरीके की अपनी सीमाएं हैं। हमारे पास जो संसाधन है हम उसमें सर्वे करते हैं। ऐसे में साफ है कि लेबर ब्‍यूरो का डाटा नई नौकरियों को लेकर देश की सही तस्‍वीर नहीं दिखाता है। 

 

लेबर ब्‍यूरो को नहीं पता चलता कहां आई नई इंडस्‍ट्री 

 

अधिकारी के मुताबिक मौजूदा समय में हमें सैंपल लेने में भी बहुत दिक्‍कत होती है। हमें पता नहीं होता है कि कहां पर नई इंडस्‍ट्री आई है। जिससे हमारे लिए नई नौकरियों को लेकर सटीक डाटा कैप्‍चर करना मुश्किल होता है। इसके अलावा मौजूदा तरीके में मोदी सरकार द्वारा पिछले तीन साल में नौकरियां पैदा करने के लिए नीतिगत मोर्च पर उठाए गए कदमों को कवर नहीं किया जा सका है। जैसे मुद्रा स्‍कीम, स्‍टार्ट अप इंडिया जैसी स्‍क्‍ीमों से जो गतिविधियां बढ़ी हैं उसे लेबर ब्‍यूरो के सर्वे में कवर नहीं किया जा सका है। 

 

आगे पढें- लगातार कम हो रहीं हैं नई नौकि‍रयां 

 

 

लगातार कम हो रही हैं नई नौकरियां 

 

मोदी सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल में लेबर ब्‍यूरो के डाटा के मुताबिक नई नौकरियां लगातार घट रहीं हैं। इसको लेकर विपक्ष और समाज के दूसरे तबकों में मोदी सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। 2014  से 2016 के बीच नई नौकरियों की संख्‍या में 60 फीसदी तक गिरावट आई है। 

 

 

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