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Home » Economy » PolicyModi Government looking at REITS model to monetise land assets of CPSE and enemy property

धांसू वार / पाकिस्तानियों और चीनियों की संपत्ति बेचने के लिए मोदी सरकार ने बनाया नया प्लान, 1 लाख करोड़ का होगा फायदा

शत्रु संपत्ति बेचने के लिए वित्त मंत्रालय कर रहा नए प्लान पर विचार

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नई दिल्ली। बंटवारे के बाद पाकिस्तान और 1962 के बाद चीन जा बसे लोगों को भारत में स्थित संपत्ति को बेचने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने नया प्लान बनाया है। केंद्र सरकार अब इन शत्रु संपत्तियों को बेचने के लिए रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REIT) के जरिए बेचने की योजना बना रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय इस योजना पर विचार कर रहा है।

क्या है REIT
REIT रियल एस्टेट में निवेश का एक साधन है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) इसको रेगुलेट करता है। REIT मॉडल के तहत संपत्ति को एक ट्रस्ट को सौंप दिया जाता है। इसके बाद संस्थागत निवेशक इस ट्रस्ट में निवेश करते हैं। एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्रालय सरकारी कंपनियों की मुख्य कारोबार से अलग संपत्तियों और शत्रु संपत्तियों को बेचने या लीज पर देने पर विचार कर रहा है। REIT को लेकर सेबी ने 2014 में दिशा निर्देश जारी किए थे। लेकिन अभी तक इस सेक्टर में कोई तेजी नहीं आई है। शत्रु संपत्तियों की कस्टडी गृह मंत्रालय के अधीन आती है। अधिकारी के अनुसार, बेचे जानी वाली शत्रु संपत्तियों की पहचान कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (सीईपीआई) या गृह मंत्रालय पहचान करेंगे। इसको लेकर संबंधित राज्य सरकारों और अन्य पक्षों से भी बातचीत की जाएगी।
 

भारत में करीब एक लाख करोड़ की शत्रु संपत्ति


गृह मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 1 लाख करोड़ रुपए की शत्रु संपत्ति है। इनकी संख्या 9400 के करीब है। इसके अलावा तीन हजार करोड़ रुपए के शत्रु शेयर भी भारत सरकार के पास हैं। इन संपत्तियों में से सबसे ज्यादा 4991 उत्तर प्रदेश, 2735 पश्चिम बंगाल और 487 संपत्ति दिल्ली में स्थित हैं। इसके अलावा भारत छोड़कर चीन जाने वालों की 57 संपत्ति मेघालय, 29 पश्चिम बंगाल और 7 आसाम में स्थित हैं। केंद्र सरकार लंबे समय से इन संपत्तियों को बेचने की कोशिश कर रही है। 

क्या होती है शत्रु संपत्ति


बंटवारे के बाद पाकिस्तान में जा बसे लोगों और 1962 के युद्ध के बाद चीन चले गए लोगों की भारत में स्थित संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहा जाता है। 1968 में संसद द्वारा पारित शत्रु संपत्ति अधिनियम के बाद इन संपत्तियों पर भारत संरकार का कब्जा हो गया था। तब से इन संपत्तियों की देखभाल गृह मंत्रालय कर रहा था। देश के कई राज्यों में शत्रु संपत्ति फैली हुई है। लंबे समय से कई संगठन इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की मांग कर रहे थे। केंद्र सरकार ने अब जाकर इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की अनुमति दी है। 2017 मं सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम में बदलाव कर इन लोगों का संपत्ति से अधिकार खत्म कर दिया था।

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