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Moody's रेटिंग: मनमोहन ने सरकार पर साधा निशाना, कहा-इकोनॉमी की मुश्किलें हैं बरकरार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुआई में कांग्रेस ने सरकार पर तगड़ा हमला किया है।

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कोच्चि. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी द्वारा इंडियन इकोनॉमी की रेटिंग अपग्रेड किए जाने से भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार फूली नहीं समा रही हो, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुआई में कांग्रेस ने उस पर तगड़ा हमला किया है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को 'यह झूठा मुगालता' नहीं पालना चाहिए कि इकोनॉमी मुश्किलों से उबर चुकी है। उधर पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी चिदंबरम ने भी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि यही सरकार पहले मूडीज की रेटिंग की प्रक्रिया को गलत बता चुकी है।

 

अमेरिका बेस्ड एजेंसी ने भारत की रेटिंग बीएए2 से बढ़ाकर बीएए3 करते हुए आउटलुक स्टेबल से पॉजिटिव कर दिया। साथ ही कहा कि रिफॉर्म्स से कर्ज के बढ़ते लेबल में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी।

 

 

मुगालते में नहीं रहे सरकार

उन्होंने मूडीज की रेटिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मुझे इस बात की खुशी है कि मूडीज ने ऐसा किया, लेकिन हमें फिलहाल ऐसा मुगालता नहीं पालना चाहिए कि हम मुश्किलों से उबर चुके हैं।' सिंह ने मूडीज द्वारा देश की रेटिंग बढ़ाये जाने पर अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही।

 

 

इकोनॉमी को उद्देश्यपूर्ण गाइडैंस की जरूरतः मनमोहन

एक सेमिनार में सिंह ने कहा कि इकोनॉमी को मजबूत उद्देश्यपूर्ण गाइडैंस की जरूरत है, ताकि देश 8 से 10 फीसदी की ग्रोथ रेट की ओर बढ़ सके जो सरकार खुद चाहती है। सिंह की टिप्पणी वित्त मंत्री अरुण जेटली के मूडीज के कदम पर दिए गए बयान के संदर्भ में आई है। जेटली ने शुक्रवार को कहा था कि मूडीज द्वारा देश की साख 13 साल बाद बढ़ाना सरकार के आर्थिक सुधारों को देर से दी गई मान्यता है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल के दाम में वृद्धि को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि इससे देश की राजकोषीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

 

क्रूड बढ़ा सकता है मुसीबत

उन्होंने कहा, 'क्रूड की कीमतें 62 से 64 डॉलर प्रति बैरल पर हैं, जो कुछ महीने पहले 40-45 डॉलर प्रति बैरल थी। इससे बैलेंस ऑफ पेमेंट के साथ फिस्कल डेफिसिट प्रभावित हो सकता है। जीएसटी के बारे में पूछे जाने पर पूर्व पीएम ने कहा कि इसे बेवजह जल्दबाजी में लागू किया गया और नौकरशाही ने इसके लिए अच्छे से तैयारी नहीं की।'

 

इसी सरकार ने मूडीज पर उठाए थे सवालः चिदंबरम

वहीं पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी चिदंबरम ने मूडीज के रेटिंग बढ़ाने पर सरकार के उत्साह की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि कुछ महीने पहले इसी सरकार ने इस रेटिंग एजेंसी के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, 'कुछ ही महीने पहले सरकार ने कहा था कि मूडीज के तरीके गलत हैं। शक्तिकांत दास (आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव) ने मूडीज के रेटिंग के तरीके पर सवाल उठाते हुए लंबा पत्र लिखा था। उन्होंने मूडीज के रेटिंग के तरीके को कमजोर बताते हुए सुधार करने की मांग की थी।'

 

लगातार घट रही है ग्रोथ रेट

चिदंबरम ने रेटिंग में सुधार पर सरकार की प्रतिक्रिया का मजाक उड़ाते हुए कहा कि इस सरकार के लिए मूडीज के तौर तरीके 2016 तक ही खराब थे। मूडीज द्वारा तेज ग्रोध का हवाला दिए जाने के बाबत पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि इसी एजेंसी और सरकार का मौजूदा फाइनेंशियल ईयर का ग्रोथ अनुमान 6.7 फीसदी है। उन्होंने कहा कि इकोनॉमी की ग्रोथ रेट2015-16 में 8 फीसदी थी। 2016-17 में यह 6.7 फीसदी थी और 2017-18 में यह 6.7 फीसदी है। उन्होंने कहा, 'ग्रोथ रेट बढ़ रही है या घट रही है, आप ही तय करें।'

 

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