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मनी भास्कर विशेष / अगर किसी को उधार दिए हैं रुपए, तो तीन साल के अंदर करें क्लेम, नहीं तो डूब जाएगा पैसा

जानिए Law of Limitation Act के बारे में

know about suit of recovery under law of limitation act
  • तीन साल बाद उधार दिया हुआ पैसा वापस दिलाने में कानून भी आपकी मदद नहीं कर सकता है।

नई दिल्ली.

अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को आपने भी रुपए उधार दिए होंगे। ऐसा भी हुआ होगा कि उधार लेने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाए होंगे या देने से ही मना कर दिए होगा। अगर कोई आपके दिए हुए रुपए लौटाने से इनकार कर दे, तो आप कोर्ट में केस दर्ज कराकर पैसा पाने की कार्रवाई कर सकते हैं। लेकिन, इसकी भी एक समयसीमा होती है। सुप्रीम कोर्ट के वकील सुबोध पाठक के मुताबिक अगर आपने किसी को रुपए उधार पर दिए हैं और उस व्यक्ति ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया है, तो आपके पास कार्रवाई करने के लिए तीन साल का समय होता है। इसके बाद आपका उधार दिया हुआ पैसा वापस दिलाने में कानून भी आपकी मदद नहीं कर सकता है।

 

ऐसे समझिए पूरा मामला-

मान लीजिए एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति को जनवरी, 2019 में एक लाख रुपए उधार दिए। दूसरे व्यक्ति ने जुलाई से पैसा लौटाना शुरू किया और सितंबर, 2019 तक हर महीने 10-10 हजार रुपए करके कुल 30 हजार रुपए ही लौटाए। इसके बाद उसके 70 हजार रुपए अभी भी बकाया हैं। ऐसे में अगर वह बाकी का रुपया चुकाने से इनकार करता है या समय लगता है, तो आखिरी पेमेंट की डेट से लेकर तीन साल तक के बीच पहला व्यक्ति सिविल कोर्ट में पैसों की रिकवरी का केस डाल सकता है। इस केस में अक्टूबर, 2019 से लेकर सितंबर, 2022 तक वह कोर्ट में केस दाखिल कर सकता है। अगर उधार देने वाले व्यक्ति ने तीन साल में रिकवर का केस फाइल नहीं किया तो, उसका पैसों को रिकवर करने का अधिकार खत्म हो जाएगा। भारतीय कानून संहिता में दिए गए Law of Limitation Act, 1963 के Suit of Recovery के तहत दूसरी पार्टी से आखिरी किश्त आने की तारीख से लेकर तीन साल तक केस फाइल करना होगा।

 

हर किसी पर लागू हाेगा यह कानून

यह कानून किसी व्यक्ति, बैंक और सभी वित्तीय संस्थाओं पर लागू होगा। अगर बैंक ने भी किसी व्यक्ति को लोन दिया है और वह व्यक्ति लोन नहीं चुका पा रहा है, तो बैंक आखिरी ट्रांजैक्शन की तारीख से लेकर तीन साल के बीच कभी भी रिकवरी का केस दर्ज करा सकता है। इस कानून के तहत कोई भी पार्टी किसी भी पार्टी से पैसा रिकवर करने का केस दर्ज करा सकती है।

 

नुकसान का क्लेम भी कर सकते हैं

मान लीजिए कि उधार लेने वाले व्यक्ति द्वारा समय पर पैसा वापस न करने से उधार देने वाले व्यक्ति अपना कोई बड़ा भुगतान करने में चूक गया, जिससे उसे आर्थिक नुकसान हुआ, तो वह इस नुकसान की भरपाई के लिए भी क्लेम कर सकता है। Law of Limitation Act के मुताबिक रिकवरी का केस दर्ज कराते समय उधार देने वाला व्यक्ति अपनी मूल रकम पर ब्याज की मांग कर सकता है। साथ ही अगर उसे पैसा समय पर न मिलने से कोई आर्थिक नुकसान हुआ है, तो वह उस नुकसान की भरपाई के लिए रकम की मांग कर सकता है। यानी आपने जितना उधार दिया है उसमें ब्याज और अपना आर्थिक नुकसान जोड़कर क्लेम कर सकते हैं।

 

कोर्ट करेगा निर्णय

एक बार आपने केस फाइल कर दिया, तो यह तय करना कोर्ट की जिम्मेदारी होगी कि आपको पैसा वापस मिलेगा या नहीं। और अगर आपको अपनी रकम वापस मिलेगी, तो कितनी मिलेगी और कब तक मिलेगी। यह कार्रवाई पूरी तरह कोर्ट के नियमों के मुताबिक चलेगी, जिसमें दोनों पार्टियों की सुनवाई होगी और इसके बाद कोर्ट फैसला अपना फैसला देगा।

 

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