असर /बदल गया किलोग्राम, लेकिन आप पर नहीं पड़ेगा इसका कोई असर

  • औद्योगिक स्तर पर इसका असर देखने को मिलेगा
  • वैज्ञानिक अब माप के तौर पर प्लांक कॉन्स्टैंट का प्रयोग करेंगे।

Money Bhaskar

May 22,2019 12:52:42 PM IST

नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया के 101 देशों में सोमवार से किलोग्राम यानी किलो की परिभाषा बदल गई है। अब एक किलोग्राम को प्लांक कॉन्स्टेंट के आधार पर मापा जाएगा। हालांकि, इसका असर आम जीवन पर नहीं पड़ेगा। किलोग्राम को पहली बार 1795 में डिफाइन किया गया था। 1889 में इसे बदला गया था। किलोग्राम के अलावा एम्पियर, केलविन और मोल को भी प्लांक कॉन्स्टेंट के आधार पर मापा जाएगा। मीटर, सेकेंड और कैंडेला की इकाइयां पहले से ही प्लांक कॉन्स्टेंट के आधार पर मापी जाती हैं। यह नया मानक पूरी दुनिया में वैज्ञानिकों को सटीक माप उपलब्ध कराएगा। इसे एक बार लागू करने के बाद सभी एसआई यूनिट फंडामेंटल कंस्टेंट की प्रकृति पर आधारित होंगी, जिसके मायने हमेशा के लिए तय हो जाएंगे और ये और भी अधिक सटीक पैमाइश कर पाएगा।

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पहले ऐसे पता करते थे एक किलो कितना होगा


एक किग्रा का वजन एक अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का हिस्सा है। जिस पर सहमति 1889 में बनी थी। इसे इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम कहा जाता है। इस प्रोटोकॉल को 'ल ग्रैंड के' भी कहा जाता है। इसी के तहत प्लेटिनम और इरीडियम मिक्स धातु का छोटा सिलिंडर पेरिस की संस्था ब्यूरो इंटरनेशनल दे पॉइड्स एत मीजर्स इन सेवरेस में रखा है। इसी सिलिंडर के वजन को 1 किग्रा माना जाता है। जिसे हर 30-40 साल में जांच के एक बहुत बड़े अभ्यास के लिए बाहर निकाला जाता है और दुनिया भर के बहुत से बांटों और मापों को इससे नापा जाता है।

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यूं तो किलोग्राम बदल चुका है लेकिन इससे आपको परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी जानिए कैसे:-

- 6 नवम्बर 2018 को फ्रांस के वार्सा में जनरल कॉन्फ्रेंस ऑन वेट्स एंड मेजर्स में 60 देशों के प्रतिनिधियों ने वोट के जरिए तय किया कि अब से किलोग्राम को प्लांक कॉन्स्टेन्ट के आधार पर मापा जाएगा।

- किलो और माप की परिभाषा बदलने का आम आदमी जिंदगी पर असर नहीं होगा। ठेले पर सब्जी बेचने वाले भैया आने वाले दिनों में भी उसी लोहे के काले बाट से सब्जी तौलते नजर आएंगे।

- औद्योगिक स्तर पर इसका असर देखने को मिलेगा।

- स्कूल में बच्चों को अपनी पढ़ाई के दौरान किलो की अब नई परिभाषा याद करनी होगी।

- वैज्ञानिक अब माप के तौर पर प्लांक कॉन्स्टैंट का प्रयोग करेंगे। यह क्वांटम मैकेनिक्स की एक वैल्यू है। यह ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेट्स का भार होता है।

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