आवंटन बढ़ाने के साथ बजट में ग्रामीण विकास के लि‍ए नीति‍गत उपायों की घोषणा संभव

डॉ. मही पाल

Jan 26,2017 02:16:00 PM IST
नई दिल्ली। ग्रामीण विकास एक प्रक्रिया है। इसका मकसद सामाजिक आर्थिक गतिविधियों के जरिए ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के रहन सहन के स्‍तर को बेहतर बनाना है। इसके लिए सरकारों ने ग्रामीण विकास के बजट के जरिए बहुस्‍तरीय रणनीति अपनाई। रणनीति के तहत सरकारों ने स्‍वरोजगार, रोजगार पैदा करने, विशेष क्षेत्रों के विकास, बेसि‍क जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रावधान किए।
इसके अलावा सरकारों ने संस्‍थागत और कानूनी सुधारों के साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने के लिए भी कदम उठाए। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय - महात्‍मा गांधी नेशनल रूरल एंप्‍लायमेंट गारंटी एक्‍ट (मनरेगा), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद आदर्श ग्राम योजना और और डिजिटल इंडिया लैंड रि‍कॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) जैसी कई योजनाएं चला रहा है।
हालांकि नोटबंदी और पांच राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आगामी बजट बेहद अहम है। इस लेख में ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत चलाई जा रही स्‍कीमों के लिए बजट आवंटन बढ़ने की उम्‍मीदों और कार्यक्रम ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने के सुझावों पर फोकस किया गया है।
मनरेगा के बजट में हो सकता है इजाफा
मनरेगा का मकसद एक साल में कम से कम 100 दिन काम मुहैया करा कर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों की आजीविका की सुरक्षा को बढ़ाना है। हालांकि पिछले 5 साल में प्रति परिवार औसतन 50 दिन से अधिक का रोजगार नहीं मुहैया कराया गया है। मौजूदा वर्ष में प्रति परिवार को औसतन 38.3 दिनों का ही रोजगार मुहैया कराया गया था।
इस कार्यक्रम के तहत 2016-17 के दौरान बजट आवंटन 38, 500 करोड़ रहा है जो कि पिछले वर्ष के आवंटन से 3801 करोड़ रुपए अधिक है। इस कार्यकम के तहत अगले साल का बजट आवंटन 10 फीसदी तक बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत भी आवंटन बढ़ सकता है। इस योजना के तहत मौजूदा वर्ष के लिए 15,000 करोड़ रुपए का आवंटन पर्याप्‍त नहीं है।
इनमें आवंटन बढ़ने की उम्‍मीद नहीं
दीनदयाल अंत्‍योदय योजना - नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (डेएवाई एनआरएलएम) के लिए मौजूदा वर्ष का आवंटन 3000 करोड़ रुपए है और इसका बजट आवंटन बढ़ने की उम्‍मीद नहीं है। नेशनल सोशल असिस्‍टेंस प्रोग्राम (एनएसएपी) के तहत मौजूदा वर्ष में आवंटन 9500 करोड़ रुपए है और उम्‍मीद है कि यह इसी स्‍तर पर रहेगा।
सरकार वहन कर सकती है पूरा खर्च
रूअरबन मिशन के तहत मैदानी इलाकों के लिए क्रिटिकल गैप फंडिंग प्रोजेक्‍ट, कैपिटल एक्‍सपेंडिचर का 30 फीसदी या 30 करोड़ में से जो भी कम हो पर कैप किया जा सकता है। रेगिस्‍तानी, पहाड़ी और आदिवासी इलाकों में क्रिटिकल गैप फंडिंग प्रोजेक्‍ट कैपिटल एक्‍सपेंडिचर के 30 फीसदी या 15 करोड़ रुपए में से जो भी कम हो पर कैप की जा सकती है।
इसी तरह से फैसला किया गया था कि 30 करोड़ रुपए केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारें 60 और 40 के अनुपात में साझा करेंगी। उम्‍मीद है कि बजट में पहले के प्रावधान को बहाल किया जा सकता है, जिसके तहत पूरा 30 फीसदी केंद्र सरकार वहन करती थी।
मजबूत इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की जरूरत है
अर्थव्‍यवस्‍था के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बेहद अहम है। अर्थव्‍यवस्‍था के विभिन्‍न सेक्‍टर इसके चारों तरफ घूमते हैं। यह अर्थव्‍वस्‍था के न सिर्फ प्राइमरी, सेकेंडरी और टेरीटरी सेक्‍टरों को मजबूती प्रदान करता है बल्कि यह विकास के विभिन्‍न स्‍टेकहोल्‍डर्स की क्षमताओं का विस्‍तार भी करता है। देश भर में फैले छोटे कारोबारी और कंपनियों को विकास के लिए अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले मजबूत इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की जरूरत है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर देश उस बड़ी आबादी के विकास के दरवाजे खोलता है जो गरीबी के जाल में फंसी हुई और तमाम सुविधाओं से वंचित है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बढ़ सकता है आवंटन
इन बातों को ध्‍यान में रखते हुए 19,000 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के साथ प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को लागू किया जा रहा है। यह पिछले वर्ष के बजट आवंटन से 26 फीसदी अधिक है। उम्‍मीद है कि इस योजना के तहत बजट आवंटन इस बार बढ़ सकता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों पर सुरक्षित ट्रांसपोर्ट सुविधाओं की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना भी बजट में लांच की जा सकती है। इस बजट से ग्रामीण उद्यमियों, किसानों और कामगारों को यात्रा करने और सामान ले जाने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण विकास के नीतिगत पहूल पर उम्‍मीद है कि बजट में कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए नीतिगत उपायों की घोषणा हो सकती है। इसके तहत स्‍थानीय स्‍तर पर सेवाओं और गुड गवर्नेंस को प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए क्‍लस्‍टर एप्रोच अपनाने की जरूरत होगी। ऐसे में ग्रामीण इलाकों को क्‍लस्‍टर्स में रखा जा सकता है।
(लेखक डॉ. माही पाल इंडि‍यन इकोनॉमि‍क्‍स सर्वि‍सेज के पूर्व अधिकारी हैं)
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