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गर्व / पाकिस्तान को मात देगा इंडियन नेवी का आईएनएस इंफाल, 75 प्रतिशत सामान स्वदेशी

60 साल तक खरीदार थी नौसेना, अब बन गई निर्माता: नेवी चीफ

INS Imphal standing on the path of militants in the Taj attack
  • भारत में बना है इंफाल, रडार को देता है चकमा, गाइडेड मिसाइल को नेस्तानाबूत करने में माहिर
  • अत्याधुनिक हथियारों और ताकतवर ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइलों से लैस होगा यह पोत

नई दिल्ली. भारतीयों के लिए एक बार फिर गर्व का क्षण है। भारतीय नौसेना ने शनिवार को विध्वंसक जहाज आईएनएस इंफाल को मुंबई के मझगांव तट पर समुद्र में उतारा दिया है। रडार को चकमा देकर दुश्मन पर हमला करने की ताकत वाला ये जहाज गाइडेड मिसाइलों को ध्वस्त करने में भी माहिर है। इसे भारत में ही डिजाइन करके बनाया गया है। इस युद्धपोत के आने से भारतीय नौसेना की ताकत में काफी इजाफा हो गया है। इसका वजन 3,037 टन है। अब जल्द ही इसे अत्याधुनिक हथियारों और ताकतवर ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइलों से लैस किया जाएगा। जिसके बाद इसका वजन 7,300 टन हो जाएगा।

 

60 साल की कोशिश के बाद मिली यह उपलब्धि


नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने इसे लांच किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि 60 के दशक में शुरू की गई मेहनत रंग लाई है। पहले नौसेना खरीदार थी लेकिन अब वह निर्माता बन गई है। लांबा ने कहा कि अब नौसेना पूरी तरह से आत्मनिर्भर है। इंफाल पूरी तरह स्वदेशी है। इसका 75 फीसदी सामान स्वदेशी निर्माताओं का है।  उन्होंने मझगांव डॉक लिमिटेड, नौसेना, डीआरडीओ, आयुध निर्माणियों और रक्षा क्षेत्र के उपक्रमों की सराहना की और कहा कि ये देश की समुद्री सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने में अहम योगदान दे रहे हैं।

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प्रोजेक्ट 15 बी के तहत बना


प्रोजेक्ट 15 बी के तहत बने दो युद्धपोत 2015 और 2016 में आए थे। ये विशाखापत्तनम और मोरमुगाओ बंदरगाह पर समुद्र में उतारे गए थे। आईएनएस इसके तहत बना तीसरा युद्धपोत है। साल 2021 में तीनों युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल कर लिए जाएंगे। एक अन्य आईएनएस पोरबंदर का निर्माण अभी चल रहा है। ये युद्धपोत भी जल्द ही आईएनएस दिल्ली, आईएनएस मुंबई, आईएनएस मैसूर, आईएनएस कोलकाता, आईएनएस कोच्चि और आईएनएस चेन्नई की जमात में शामिल हो जाएगा। 

 

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आईएनएस इंफाल में यह खूबियां 

 

  • इसमें गाइडेड मिसाइलों को ध्वस्त करने की क्षमता है। 
  • इसकी लंबाई 163 मीटर और चौड़ाई 17.4 मीटर है।
  • चार गैस टरबाइन से चलने वाले इस पोत की गति 30 नॉटिकल मील है। 
  • इसकी मिसाइलें जमीन, समुद्र और आकाश में निशाना साध सकेंगी।
  • आईएनएस इंफाल जहाज में दो हेलीकॉप्टर तैनात हो सकते हैं। 
  • ये युद्धपोत दुनिया के दूसरे देशों में निर्मित अपनी श्रेणी के युद्धपोतों को टक्कर देने में सक्षम है।

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नौसेना का पहला वाहन पोत था आईएनएस विक्रांत 


आईएनएस विक्रांत नौसेना का पहला वाहन पोत था। इस पोत को वर्ष 1957 में ब्रिटेन से खरीदा गया था। तब इसे एचएमएस हर्क्युलिस के नाम से जाना जाता था। साल 1961 में इसे नौसेना में शामिल किया गया। 31 जनवरी 1997 को इसे सेनानिवृत्त कर दिया गया था। दो दशक से ज्यादा समय बाद इसी नाम से नए वाहन पोत को नौसेना में शामिल किया जाएगा।

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1971 के युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका


साल 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में बांग्लादेश का जन्म हुआ था। 1971 के इस युद्ध में भारत की तीनों सेनाओं ने अहम रोल निभाया था। भारतीय नौसेना के विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत ने भी युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी।

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