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लेबर इश्‍यूज पर बढ़ेगी मोदी की परेशानी, दिसंबर से ट्रेड यूनियनों की ये है तैयारी

आने वाले महीनों में लेबर इश्‍यूज पर मोदी सरकार की परेशानी बढ़ सकती है। ट्रेड यूनियन अपनी मांगों को लेकर दिसंबर से राज्‍य

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नई दिल्‍ली। आने वाले महीनों में लेबर इश्‍यूज पर मोदी सरकार की परेशानी बढ़ सकती है। ट्रेड यूनियन अपनी मांगों को लेकर दिसंबर से राज्‍यों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी क रहीं हैं। अगर मोदी सरकार ट्रेड यूनियन की मांगों पर फैसला नहीं करती है तो बजट सत्र के समय ट्रेड यूनियन देशव्‍यापी हड़ताल भी कर सकती हैं। हाल में ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ ने मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के ख्रिलाफ राष्‍टीय राजधानी में सड़कों पर उतर कर अपने तेवर दिखाए हैं। ऐसे में 2019 के आम चुनाव से पहले मोदी सरकार के लिए श्रमिकों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना एक बड़ी चुनौती होगी। 

 

दिसंबर में राज्‍यों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी 

 

इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रेसीडेंट जी संजीव रेड्डी ने moneybhaskar.com को बताया कि मोदी सरकार न्‍यूनतम वेतन बढ़ाने सहित श्रमिकों से जुड़ी हमारी मांगों पर कोई ध्‍यान नहीं दे रही है। अगले माह से हम सेंट्रल ट्रेड यूनियन के बैनर तले सभी राज्‍यों में जिला स्‍तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। इसके बावजूद अगर सरकार हमारी मांगों पर कोई कदम नहीं उठाती है तो हम फरवरी में होने वाले संसद के बजट सत्र में देशव्‍यापी हड़ताल भी कर सकते हैं। 

 

न्‍यूनतम मजदूरी नहीं बढ़ाना चाहती है सरकार 

 

जी संजीव रेड्डी का कहना है कि मोदी सरकार इंडस्‍ट्री के दबाव में न्‍यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्‍ताव वापस ले लिया है। इसके अलावा मोदी सरकार श्रमिकों के काम के तय 8 घंटे का नियम भी खत्‍म करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा युवओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए भी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। 

 

भारतीय मजदूर संघ ने भी दिखाए तेवर 

 

ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ ने 17 नवंबर को अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्‍ट्रीय राजधानी में सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया है। भारतीय मजदूर संघ के महासचिव विरजेश उपाध्‍ययाय का कहना है कि केंद्रीय श्रम मंत्री ने गुजरात चुनाव के बाद हमारी मांगों पर बातचीत करने का आश्‍वासन दिया है। अगर सरकार हमारी मांगों पर जल्‍द ही ठोस कदम नहीं उठाती है तो हम आगे की रणनीति तय करेंगे। 


श्रम मंत्री ने ट्रेड यूनियनों से की थी बातचीत 

 

7 नवंबर को केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिनिधियों से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों ने न्‍यूनतम मजदूरी बढ़ाने और ईपीएफओ के पेंशनर्स के लिए मिनिमम पेंशन बढ़ा कर 3,000 रुपए करने सहित अपनी 12 सूत्रीय मांगे श्रम मंत्री के सामने रखी। 

 

सितंबर 2016 में सेंट्रल ट्रेड यूनियंस ने की थी हड़ताल 

 

ट्रेड यूनियनों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सितंबर 2016 में पूरे देश एक दिन की हड़ताल की थी। भारतीय मजदूर संघ ने खुद को इस हड़ताल से अलग रखा था। ट्रेड यूनियन  श्रमिकों को सोशल सिक्‍युरिटी फैसिलिटीज मुहैया कराने, कांट्रैक्‍ट पर काम कर रहे वर्कर्स को स्‍थाई कर्मचारियों के बराबर वेतन देने और निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों का विरोध कर रहीं हैं। इसके अलावा ट्रेड यूनियन श्रम सुधारों के नाम पर श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए कानूनों को खत्‍म करने के खिलाफ हैं। 

 

आगे की स्‍लाइड में जानें स्‍क्‍ीम वर्कर्स पर मोदी सरकार ने किया था कौन सा वादा 

 

 

स्‍क्‍ीम वर्कर्स को पीएफ और मेडिकल फैसिलिटी देने का था वादा 

पिछले मोदी सरकार ने मिड डे मील वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर्स और आशा वर्कर्स को पीएफ और मेडिकल फैसिलिटी देने का वादा किया था। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक एक्‍सपर्ट कमेटी भी बनाई थी लेकिन अब तक सरकार ने अपने इस वादे को लागू नहीं किया है। अगर सरकार इन वर्कर्स को पीएफ और मेडिकल फैसिलिटी देने का फैसला करती है तो लगभग 60 वर्कर्स को इसका फायदा मिलेगा। 

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