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पत्नी ही नहीं बच्‍चों को भी पेंशन देती है ये स्कीम, ऐसे मिलता है फायदा

ऑर्गेनाइज्‍ड सेक्‍टर के किसी भी इम्‍प्‍लॉई का इम्‍प्‍लॉयर उसके इम्‍प्‍लॉई पेंशन स्‍कीम में भी कॉन्‍ट्रीब्‍यूशन करता है।

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नई दिल्‍ली. यह बात सभी जानते हैं कि ऑर्गेनाइज्‍ड सेक्‍टर में काम करने वाली कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों के PF के साथ-साथ उसकी पेंशन यानी इम्‍प्‍लॉई पेंशन स्‍कीम (EPS) में भी योगदान करती है। इस पेंशन का लाभ कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मिलता है लेकिन इसके लिए कर्मचारी का न्‍यूनतम 10 साल लगातार नौकरी करना जरूरी है। इसके अलावा कर्मचारी के पूरी तरह से डिसेबल हो जाने पर भी वह इस पेंशन को लेने का हकदार होता है। इस पेंशन में केवल कंपनी योगदान देती है। यह इम्‍प्‍लॉई प्रोविडेंट फंड (PF) में कंपनी द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान का 8.33 फीसदी होता है। साथ ही सरकार भी इसमें योगदान देती है, जो बेसिक सैलरी के 1.16 फीसदी से ज्‍यादा नहीं होता। 

 

लेकिन यह पेंशन स्‍कीम केवल कर्मचारी को ही पेंशन नहीं देती है। बल्‍कि ईपीएफ के मेंबर कर्मचारी के मरने के बाद उसके परिवार यानी पत्‍नी या पति और बच्‍चों को भी पेंशन का लाभ मिलता है। इसे फैमिली पेंशन कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं कि ईपीएस के तहत फैमिली पेंशन का हकदार कौन-कौन होता है और कब तक उन्‍हें इस पेंशन का लाभ मिलता है। 

 

(विस्‍तृत जानकारी आप EPFO की वेबसाइट से प्राप्‍त कर सकते हैं।) 

 

आगे पढ़ें- बच्‍चे कैसे होते हैं इस पेंशन के हकदार 

क्‍या है फैमिली पेंशन 


- मेंबर इम्‍प्‍लॉई के मरने के बाद उसकी पत्‍नी को पेंशन मिलती है।  
- अगर इम्‍प्‍लॉई के बच्‍चे हैं तो उसके 2 बच्‍चों को भी 25 साल की उम्र तक पेंशन मिलती है। 
- अगर इम्‍प्‍लॉई शादीशुदा नहीं है तो उसके द्वारा PF व पेंशन के लिए बनाए गए नॉमिनी को जिंदगीभर पेंशन मिलती है। 

 

आगे पढ़ें- अगर न हो कोई नॉमिनी 

अगर नहीं है कोई नॉमिनी 


- अगर मेंबर इम्‍प्‍लॉई शादीशुदा नहीं है और न ही उसने किसी को पीएफ और पेंशन में नॉमिनी बनाया है तो ऐसी स्थिति में पेंशन के हकदार मृत इम्‍प्‍लॉई पर निर्भर उसके मां या पिता होंगे। 
- अगर पिता की मौत हो जाती है तो उसके बाद पेंशन मृत इम्‍प्‍लॉई की मां को उनकी मृत्‍यु तक मिलती है। 

 

आगे पढ़ें- अगर हों दो पत्‍नी

अगर किसी की हैं दो पत्‍नी


- अगर किसी इम्‍प्‍लॉई की दो पत्नियां हैं तो उसके मरने के बाद पेंशन की हकदार उसकी पहली पत्‍नी होगी। 
- पहली पत्‍नी की मृत्‍यु के बाद उसकी दूसरी पत्‍नी को यह पेंशन मिलेगी। 

 

आगे पढ़ें- फैमिली पेंशन के लिए सर्विस लिमिट नहीं

फैमिली पेंशन के लिए सर्विस की नहीं है लिमिट


- ईपीएफ ने फैमिली पेंशन के लिए न्‍यूनतम 10 साल की सर्विस अनिवार्यता नहीं रखी है। यानी 10 साल पूरा होने से पहले भी अगर इम्‍प्‍लॉई की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को पेंशन का लाभ मिलेगा। 
- लेकिन इम्‍प्‍लॉई को पेंशन तभी मिलती है जब उसने कम से कम 10 साल की नौकरी की हो। 

 

आगे पढ़ें- अगर मृत इम्‍प्‍लॉई की पत्‍नी कर ले दूसरी शादी

अगर इम्‍प्‍लॉई की पत्‍नी या पति कर ले दूसरी शादी


- अगर मृत इम्‍प्‍लॉई की पत्‍नी या पति की भी मौत हो जाए या फिर वह दूसरी शादी कर ले तो उसके बच्‍चों को पेंशन का लाभ मिलता रहता है। 
- मृत इम्‍प्‍लॉई के किसी भी तरह की परमानेंट डिसएबिलिटी से ग्रस्‍त बच्‍चे को पेंशन का लाभ पूरी जिंदगी दिया जाता है।  

 

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