Home » Economy » PolicyThese 3 factors may be big booster for PM Modi at economic front

इकोनॉमी से जुड़े ये 3 पॉजिटिव फैक्टर, मोदी के लिए साबित हो सकते हैं बिग बूस्टर

पिछले कुछ महीनों से सुस्त इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर लगातार आलोचना झेल रही मोदी सरकार के लिए पिछले 30 दिन राहत भरे रहे हैं।

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नई दिल्ली। पिछले कुछ महीनों से सुस्त इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर लगातार आलोचना झेल रही मोदी सरकार के लिए पिछले 30 दिन राहत भरे रहे हैं। इस दौरान इकोनॉमी को लेकर 3 ऐसी बातें हुई हैं, जो सरकार के लिए बड़ा बूस्टर साबित हो सकती हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में जहां भारत पहली बार टॉप 100 में शामिल हुआ, वहीं पिछले दिनों रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग बढ़ा दी। इसी क्रम में गुरूवार को जीडीपी ग्रोथ के मोर्चे पर भी सरकार को राहत मिली है। 

 

 

सितंबर तिमाही के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी से बढ़कर 6.3 फीसदी रही है। इसके पहले लगातार 5 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट रही थी और जून तिमाही में यह 3 साल के लो पर थी। फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली का कहना है कि इकोनॉमी में सुधार के संकेत मिल गए हैं। लगभग तीन सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है जब भारतीय इकोनॉमी पॉजिटिव डायरेक्शन में है। आगे जीडीपी बढ़कर 7-8% तक जाने की उम्‍मीद है। 

 

इकोनॉमी सुधरने के मिल रहे हैं संकेत
पूर्व सीएसओ और इकोनॉमिस्‍ट प्रनब सेन ने moneybhaskar.com बताया कि इकोनॉमी सुधार की राह पर है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इकोनॉमी की सही तस्‍वीर फरवरी में आने वाले जीडीपी डाटा से पता चलेगी। पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के डाटा में करीब 0.6 फीसदी का गैप है यह जीएसटी की डिस्‍स्‍टॉकिंग का इम्‍पैक्‍ट है। भले ही जेटली नोट बंदी और जीएसटी का असर खत्‍म होने की बात करें लेकिन हमें अगली तिमाही का इंतजार करना होगा। 

 

डिमांड फिर से पटरी पर लौटी 
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी का असर अब कम हो रहा है और डिमांड फिर से पटरी पर लौट रही है। थॉमसन रॉयटर्स इकोन डाटा के अनुसार दूसरी तिमाही में भारत की टॉप कंपनियों की बेहतर रही है। जिससे यह संकेत मिल रहा है कि डिमांड स्टोरी सही डायरेक्शन में है। आगे डिमांड और बढ़ने की उम्मीद है और अगले साल इंडियन कंपनियों की अर्निंग 25 फीसदी हो सकती है जो एशिया में सबसे अधिक रहने का अनुमान है। डिमांड बढ़ने से इकोनॉमी को रफ्तार मिलेगी। सीएसओ के डाटा के मुताबिक मांग बढ़ने का ही नतीजा है कि मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में उछाल देखा जा रहा है। डिमांड अर्बन और रूरल दोनों एरिया से आ रही है। जिससे जीडीपी ग्रोथ को रफ्तार मिली है।  

 

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप 100 में शामिल 
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैकिंग में 30 पायदान का सुधार हुआ है। इस मामले में भारत पहली बार टॉप 100 में शामिल हो गया है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत में होने वाले रिफॉर्म्स की तारीफ की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में टैक्स पेमेंट सिस्टम को आसान बनाया गया है, कर्ज लेने के नियम आसान हुए हैं। वहीं, इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड की तारीफ की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जीएसटी का असर आगे होगा, जिससे  रैंकिंग में और सुधार हो सकता है। एक्सपट्स्र का मानना है कि इससे भारत में निवेश बढ़ेगा, जो इकोनॉमी के लिए बूस्टर बन सकता है। 

 

मूडीज ने बढ़ाई रेटिंग 
ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी इंडियन इकोनॉमी पर अपना भरोसा जताया है। मूडीज ने करीब 13 साल बाद भारत की रेटिंग Baa3 से बढ़ाकर Baa2 कर दी है। मूडीज ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि भारत की रेटिंग अपग्रेड होने की वजह वहां देश में हो रहे इकोनॉमिक रिफॉर्म्स हैं। जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा, भारत की ग्रोथ में इजाफा होगा। मूडीज ने यह भी कहा कि उम्मीद है भारत में रिफॉर्म और तेज होंगे। 

 

निवेश बढ़ने की उम्मीद 
मूडीज द्वारा रेटिंग बढ़ाए जाने के बाद माना जा रहा है कि भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसे में सरकार के पास रिजर्व बढ़ेगा और कर्ज कम करने में मदद मिलेगी। मूडिज द्वारा रेटिंग बढ़ाए जाने के बाद एक पॉजिटिव सेंटीमेंट बना और शेयर मार्केट में भी अच्छी- खासी तेजी देखी गई थी। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) अरविंद सुब्रमण्‍यम के अनुसार मूडीज के इस कदम से साफ है कि सरकार के एक्‍शन सही दिशा में है। जीएसटी और बैंकरप्‍सी जैसे सुधारों को रेटिंग एजेंसी ने लॉन्‍ग टर्म के नजरिए से सही बताया है।  

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