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इन कारोबारियों के कदमों में थी दुनिया, एक चूक ने कर दिया बर्बाद

उनकी गिनती देश के अरबपतियों में होती थी लेकिन उनकी एक गलती ने उन्हें फर्श पर ला दिया।

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नई दिल्ली। अभी तक आपने फर्श से अर्श तक पहुंचने वाले कारोबारियों के बारे में जाना होगा। आज हम आपको ऐसे कारोबारियों के बारे में बता रहे हैं एक समय में जिनके कदमों में दुनिया रहती थी। उनकी गिनती देश के अरबपतियों में होती थी लेकिन उनकी एक गलती ने उन्हें फर्श पर ला दिया। आइए जानते हैं ऐसे ही कारोबारियों के बारे में...

 

 

बी रामालिंगा राजू

 

चर्चित सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विस लिमिटेड की स्थापना बी रामालिंगा राजू ने अपने साले डीवीएस राजू के साथ मिलकर 1987 में थी। सत्यम दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में स्थापित होने वाली पहली कंपनी थी। अपनी स्थापना के कुछ समय बाद ही सत्यम सॉफ्टवेयर क्षेत्र की देश की चार बड़ी कंपनियों में से एक बन गई। इसने साठ हजार लोगों को रोजगार दिया। लेकिन, फिर इसके गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। कंपनी की नीव रखने वाले बी रामालिंगा राजू अर्श से फर्श पर पहुंच गए।

 

 

विश्व बैंक ने खत्म किया करार

 

बी रामालिंगा राजू के कंपनी के मुनाफ़े में 'फर्ज़ीवाड़ा' स्वीकार करने के बाद से सत्यम को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है। विश्व बैंक ने कंपनी के साथ आठ साल का करार खत्म कर लिया। वहीं, कंपनी छोड़कर कर्मचारियों और निदेशकों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से चार लोगों ने इस्तीफा दे दिया। वहीं, कंपनी के 120 कर्मचारी नौकरी छोड़कर चले गए। राजू को कई साल जेल में काटने पड़े। अभी उन्हें बेल मिली हुई है और वह जेल से बाहर हैं।

 

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विजयपत सिंघानिया

 

 

देश के बड़े कारोबारी में से एक विजयपत सिंघानिया अभी हाल में ही चर्चा में थे। उन्होंने अपने बेटे गौतम सिंघानिया पर घर से निकालने का आरोप लगाया। उन दोनों का केस फिलहाल कोर्ट में चल रहा है। रेमंड ग्रुप के फाउंडर वियपत सिंघानिया की गिनती अरबतियों में होती थी। विजयपत सिंघानिया रेमंड ग्रुप के चेयरमैन थे लेकिन अब उनके बेटे गौतम सिंघानिया कारोबार संभालते हैं।

 

 

बेटे ने लिया कारोबार का होल्ड

 

गौतम बचपन से ही कारों के लिए क्रेजी रहे हैं। इसी बात को समझते हुए उनके पिता विजयपत सिंघानिया ने उनके 18वें जन्मदिन पर उन्हें प्रीमियर पद्मिनी 1100 कार गिफ्ट की थी। आज वही विजयपत सिंघानिया अपने आलीशान घर से अलग रह रहे हैं। एक समय में उनकी नेटवर्थ 1.4 बिलियन डॉलर थी लेकिन अब उनके पास घर के किराए के लिए भी पैसा नहीं है। घर और कारोबार का पूरा होल्ड अब गौतम के पास है।

 

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सुब्रत रॉय

 

 

सुब्रत रॉय कामयाबी के पीक पर पहुंचक जेल तक पहुंच चुके हैं। सुब्रत रॉय सहारा ऊर्फ 'सहाराश्री' ने तिहाड़ जेल में 2 साल से अधिक समय बिताया है। तिहाड़ जेल से निकलने के लिए सुब्रत 9 बार जमानत की अर्जी दी। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कभी सुब्रत रॉय बिस्किट और नमकीन बेचा करते थे। वह भी लंब्रेटा स्कूटर पर। आज यह स्कूटर कंपनी मुख्यालय में रखा हुआ है। एक समय ऐसा था कि रॉय को उनका व्यापार शुरू करने के लिए एसबीआई बैंक ने पांच हजार रुपए का लोन देने से मना कर दिया था, लेकिन उन्होंने एक मित्र के साथ छोटी सी चिट फंड कंपनी शुरू की। इसके बाद उनकी सफलता की कहानी शुरू हो गई।

 

ऐसे पहुंचे फर्श तक

 

80 के दशक में वे निवेशकों से प्रतिदिन पांच से दस रुपए निवेश करने को कहते थे। कम रकम होने की वजह से लाखों की संख्या में निवेशकों ने पैसा लगाया। जिससे रॉय की संपत्ति और कंपनी बढ़ती चली गई। लेकिन, ये सफर नवंबर 2013 में आकर थम गया, जब सेबी ने निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने पर सहारा समूह के बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया। एक समय में सहारा ग्रुप डेढ़ लाख करोड़ का था जिसमें 12 लाख कर्मचारी और कार्यकर्ता थे।

 

 

 

ये है मामला जिसकी वजह से रॉय जेल गए

 

अप्रैल 2008 में सहारा ग्रुप दो कंपनियां बनाईं। सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन (एसआईआरईसीएल) और इसके लिए लोगों से पैसे लिए। पैसों को निवेशक चाहे तो इक्विटी में बदल सकता है। इसे ओएफसीडी कहते हैं। साल सितंबर 2009 में डेवलपर सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड ने आईपीओ के जरिए लोगों से पैसे निकालने चाहे। इसके लिए उसने सेबी में एक ड्राफ्ट भेजा, ताकि इस योजना का आंकलन किया जा सके।...

सेबी ने निवेशकों की जानकारी मांगी। नवबंर 2010 में सेबी ने कंपनी की इस योजना को खारिज कर दिया। साथ ही दोनों कंपनियों को कैपिटल मार्केट में उतरने से मना किया। इसके बाद इसमें जांच हुई जिसके कारण सुब्रत रॉय को जेल जाना पड़ा।

 
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