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नोटबंदी से नहीं खत्‍म हुई ब्‍लैकमनी लेकिन फैसला सही: मनी भास्‍कर सर्वे

नोटबंदी प्रधानमंत्री मोदी का सही फैसला था लेकिन इससे ब्‍लैकमनी को खत्‍म करने में बड़ी सफलता नहीं मिली है।

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नई दिल्‍ली. नोटबंदी प्रधानमंत्री मोदी का सही फैसला था, लेकिन इससे ब्‍लैकमनी को खत्‍म करने में बड़ी सफलता नहीं मिली है। नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर moneybhaskar.com की ओर से कराए गए सर्वे में यह खुलासा हुआ है। सर्वे में एक सवाल था कि नोटबंदी से ब्‍लैकमनी खत्‍म हुई या नहीं, इसके जवाब में 35.88 फीसदी लोगों ने कहा- नहीं। जबकि 33.54 फीसदी रीडर्स ने यह माना कि ब्‍लैकमनी खत्‍म हुई। सर्वे रिजल्‍ट की सबसे खास बात यह रही कि नोटबंदी के फैसले पर 43.69 फीसदी लोगों ने पीएम मोदी को 10 में से 10 नंबर दिए।

 

सर्वे रिजल्‍ट के अहम प्‍वाइंट

- 62.46 फीसदी रीडर्स ने पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले को सही माना है।

- 54.25 फीसदी रीडर्स ने नोटबंदी को सफल माना है।

- 50.07 फीसदी रीडर्स मानते हैं एक साल बाद नोटबंदी का असर कारोबार और जेब पर नहीं है।

- 43.69 फीसदी रीडर्स ने नोटबंदी के फैसले पर मोदी सरकार को 10 में से 10 नंबर दिए।

- 26.25 फीसदी रीडर्स ने कहा, नोटबंदी का जॉब और ग्रोथ रेट पर निगेटिव असर हुआ।

- 8.44 फीसदी रीडर्स ने ही माना कि नोटबंदी से लाखों लोगों की नौकरियां चली गईं।

 

2019 चुनाव में नोटबंदी बनेगा मुद्दा

सर्वे में शामिल 46.34 फीसदी रीडर्स का मानना है कि 2019 के आम चुनाव में नोटबंदी एक मुद्दा रहेगा। वहीं, ऐसा नहीं मानने वालों की संख्‍या 26.45 फीसदी रही। 17.36 फीसदी लोग यह भी मानते हैं कि 2019 के चुनाव में नोटबंदी विपक्ष का एक मुद्दा रहेगा।

 

सर्वे में शामिल 55.67 फीसदी लोग मानते हैं कि नोटबंदी का फायदा मोदी सरकार को अगले आम चुनाव में होगा और बीजेपी की वापसी होगी। जबकि, 21.2 फीसदी लोग मानते हैं कि मोदी सरकार को नुकसान होगा। 12.24 फीसदी लोग ऐसा भी मानते हैं कि अगले चुनाव तक जनता नोटबंदी को भूल जाएगी। 10.89 फीसदी का मानना है कि नोटबंदी का फायदा मोदी सरकार को नहीं मिलेगा और विपक्ष की जीत होगी।

 

एक साल बाद नहीं रहा नोटबंदी का असर

सर्वे रिजल्‍ट के अनुसार, 50.07 फीसदी लोगों ने कहा कि एक साल बाद नोटबंदी का कारोबार और जेब पर असर नहीं है। वहीं, 33.46 फीसदी मानते हैं कि अभी भी नोटबंदी का असर है। नोटबंदी के असर की बात करें तो 51.58 फीसदी लोग कहते हैं कि नोटबंदी से शुरू में परेशानी हुई। 12.31 फीसदी ने कहा कि नोटबंदी के बाद बैंकों की मनमानी झेलनी पड़ी, जबकि 9.99 फीसदी मानते हैं कि इससे करंसी की काफी किल्‍लत हुई।

 

मोदी की इमेज सख्‍त रिफॉर्मर की बनी

नोटबंदी को लेकर भले ही पीएम मोदी की आलोचना हो रही, लेकिन सर्वे में 63.41 फीसदी रीडर्स ने कहा कि नोटबंदी से मोदी की छवि सख्‍त रिफॉर्मर की बनी है। खास बात यह रही कि 18.2 फीसदी लोग ऐसा भी मानते हैं कि यह मीडिया की बनाई इमेज है।

 

लाखों लोगों की जॉब गई

मोदी के नोटबंदी के फैसले पर बहस कितनी भी कर ली जाए, लेकिन यह तो साफ है कि इसे निगेटिव इम्‍पैक्‍ट भी देखे गए। सर्वे में नतीजों से साफ है कि नोटबंदी से लाखों लोगों की जॉब गई और लोगों को बैंकों के सामने लंबी-लंबी लाइन लगानी पड़ी। 67.43 फीसदी रीडर्स की ऐसी राय दी है। इसके उलट 32.56 फीसदी ऐसे भी हैं, जिनका मानना है कि कोई निगेटिव इम्‍पैक्‍ट नहीं हुआ।

 

नोटबंदी फिर होगी?

पिछले कई महीनों से ऐसी चर्चा चल रही है कि मोदी सरकार एक और नोटबंदी कर सकती है और इसके तहत 2000 रुपए के नोट बंद किए जाएंगे। सर्वे में हमने लोगों से यह जानना चाहा कि क्‍या मोदी सरकार फिर से नोटबंदी कर सकती है, 25.92 फीसदी मानते हैं कि दोबारा नोटबंदी हो सकती है। 29.33 फीसदी कहना है नहीं, और 33.57 लोग इस पर अपनी कोई राय नहीं बना रहे हैं। जबकि 11.19 फीसदी रीडर ऐसे भी रहे, जिनका मनना है कि नोटबंदी कभी लागू नहीं होनी चाहिए।

 

आगे पढ़ें... कैसे हुआ सर्वे?  

 

कैसे हुआ सर्वे-

नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर 8 नवंबर 2017 के दिन moneybhaskar.com ने अपने रीडर्स (मोबाइल और डेस्‍कटॉप) के बीच यह सर्वे कराया। इसके नतीजे में यह जानकारियां सामने आई हैं। 

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