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रेटिंग बढ़ने से मजबूत होगा फाइनेंशियल सिस्टम, सरकार को कर्ज घटाने में मिलेगी मदद

नई दिल्ली। ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने करीब 13 साल बाद भारत की रेटिंग Baa3 से बढ़ाकर Baa2 कर दी है। एजेंसी द्वारा रेटिंग अपग्रेड करने पर इंडस्ट्री और एनालिस्ट का कहना है कि यह इंडियन इकोनॉमी, फाइनेंशियल सिस्टम और इंडस्ट्री के लिए बेहद ही पॉजिटिव है। इससे न केवल भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि ब्रांड, करंसी और इक्विटी मार्केट को मजबूती मिलेगी। 

 

सरकार कम कर सकेगी कर्ज 
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन रजनीश कुमार का कहना है कि रेटिंग में सुधार से फाइनेंशियल सिस्टम को मजबूती मिलेगी। उनका कहना है कि इससे भारत सरकार को और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को अपना कर्ज घटाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मूडीज द्वारा एसबीआई की रेटिंग अपग्रेड करने से यह साफ है कि भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम में मजबूती बनी हुई है। 

 

 

भारत होगा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन 
भारती इंटरप्राइजेज के फाउंडर एंड चेयरमैन सुनील भारती मित्तल का कहना है कि सरकार ने पिछले दिनों जिस तरह से स्ट्रक्चरल रिफॉर्म किए हैं, उसका असर दिख रहा है। मूडिज द्वारा भारत की रेटिंग बढ़ाए जाने से भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। भारत बड़ा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में रिफॉर्म बढ़ने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। 

 

करंसी, बांड और इक्विटी मार्केट को मिलेगी मजबूती
आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर का कहना है कि रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की रेटिंग अपग्रेड करने से करंसी, बांड और इक्विटी मार्केट को मजबूती मिलेगी। इससे भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा, साथ ही सरकार का रेवेन्यू भी। उनका कहना है कि भारत में रिफॉर्म की गति तेज होने के साथ निवेश की गति भी तेज होगी। 

 

कॉरपोरेट को मिलेगी बड़ी राहत 
वहीं, मुथूट फाइनेंस के एमडी जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट का कहना है कि रेटिंग बढ़ने से साफ है कि सरकार ने फिस्कल रिफॉर्म के लिए जो दिशा तय की है, वह बिल्कुल सही है। ग्लोबल स्तर पर रेटिंग बढ़ने का सीधा फायदा देश की इकोनॉमी को होगा। इससे कॉरपोरेट को उनके बॉरोइंग कास्ट पर बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, भारत में निवेश और बढ़ेगा। 

 

भारत की बढ़ेगी ग्रोथ: मूडीज 
Moody's ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि भारत की रेटिंग अपग्रेड होने की वजह वहां देश में हो रहे इकोनॉमिक रिफॉर्म्स हैं। जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा, भारत की ग्रोथ में इजाफा होगा। इस बात की भी संभावना है कि मीडियम टर्म में सरकार पर कर्ज का भार भी कम होता जाए। हमारा मानना है कि रिफॉर्म्स को सही तरीके से लागू करने पर कर्ज के तेजी से बढ़ने और ग्रोथ कम होने का खतरा कम होगा। हालांकि Moody's ने ये भी सलाह दी है कि भारत को ये भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत का ज्यादा कर्ज कहीं उसका क्रेडिट प्रोफाइल खराब न कर दे। 

 

और क्या कहा क्रेडिट एजेंसी ने?
भारत सरकार अभी कई रिफॉर्म्स का खाका तैयार कर रही है। अगर इन्हें सही वक्त पर लागू किया गया तो देश में बिजनेस और प्रोडक्टिविटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में भी बढ़ोत्तरी होगी। भारत के रिफॉर्म प्रोग्राम की खासियत ये है कि उनमें झटका सहने की ताकत है। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, जीएसटी और नोटबंदी का असर इस वित्‍त वर्ष में रहेगा। हालांकि 2018-19 में यह रफ्तार पकड़ेगी और ग्रोथ रेट बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी।  

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