भारत को हेल्‍थ सेक्‍टर में मिली तरक्‍की, 45 से 67 साल बढ़ी जीवन प्रत्‍याशा

money bhaskar team

Feb 08,2017 05:45:00 PM IST
हैदराबाद। हाल ही के दि‍नों में भारत ने हेल्‍थ-सेक्‍टर में उल्‍लेखनीय प्रगति‍ हासि‍ल की है। तेजी से होते इस चेजेंस से भारत में लाइफ एक्‍सपेंटेंसी (जीवन-प्रत्‍याशा) भी पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है। इस बारे में इंफोसिस के फाउंडर एन आर नारायणमूर्ति का कहना है कि ग्‍लोबल स्‍तर तक पहुंचने के लिए यह ग्रोथ काफी मायने रखती है। यह ग्रोथ रेट हेल्‍थ सेक्‍टर के लि‍ए काफी प्रभावी है।
मि‍लेनि‍यम डेवलपमेंट गोल्‍स तक पहुंचने में समय
बॉयो एशिया के लेक्‍चर में वर्ल्‍ड बैंक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि इंडिया में पहले से इंफेंट मॉरटैलिटी रेट पहले से कई गुना कम हुई है। हालांकि‍ रि‍पोर्ट में इस बात का जि‍क्र है कि‍ हेल्‍थ सेक्‍टर तक पहुंचने के लि‍ए अभी भारत मि‍लेनि‍यम डेवलपमेंट गोल्‍स हासि‍ल करने से चूक गई है। इस स्‍तर तक भारत को पहुंचने में अभी समय है।
तीस से चालीस सालों में आया बड़ा बदलाव
भारत में जीवन प्रत्‍याशा पर काफी गुणात्‍मक असर देखने को मि‍ला है। जहां तक लाइफ एक्‍सपेक्‍टेंसी की बात करें तो यह पि‍छले तीस से चालीस सालों में लगातार बढ़ी है। 1960 में जहां लोगों की जीवन प्रत्‍याशा 45 साल थी वहीं 2010 में यह 67 साल तक पहुंच गई है।

अभी भी बाकी है ग्रोथ की गुंजाइश
 
 रि‍पोर्ट में इस बात का जि‍क्र है कि‍ हेल्‍थ सेक्‍टर में इंडि‍या को ग्‍लोबल स्‍तर तक ले जाने के लि‍ए गुंजाइश बाकी है। बाकी देशों से तुलना करके देखा जाए तो चीन और ब्राजील की तुलना में भारत काफी पीछे रह गया है।
 
 
पड़ोसी देशों की तुलना में बढ़ी है यह ग्रोथ रेट
 
ए आर नारायण मूर्ति का कहना है कि‍ ओवरऑल गतिवि‍धि‍यों पर नजर रखी जाए तो यह सि‍चुएशन भी पूरी तरह से स्‍पष्‍ट है कि‍ भारत ने ग्‍लोबल तुलना के चलते पड़ोसी देशों से कई गुना तरक्‍की पाई है।  
 
     
भारत के इन राज्‍यों पर पड़ा अच्‍छा असर 
 
वर्ल्‍ड बैंक रि‍पोर्ट के मुताबि‍क इंडि‍यन इंफेंट मॉरटै‍लि‍टी की दर 1995 में 25 प्‍वॉइंट बढ़ी है और 2015 में यह स्‍तर पहले से बढ़ी है।  इंडि‍या के जि‍न राज्‍यों पर ज्‍यादा सुधार हुआ है उसमें साउथ और र्थ इंडि‍या ईस्‍टेट भी शामि‍ल है।
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