विवाद /डाटा लोकलाइजेशन से भारत नहीं पैदा कर सकता फेसबुक या गूगल जैसी कंपनी : फेसबुक

  • फेसबुक के वीपी ने कहा कि डाटा के लोकल स्टोरेज से टुकड़ों-टुकड़ों में बंट जाएगी इंटरनेट की दुनिया 

Moneybhaskar.com

Sep 14,2019 05:17:43 PM IST

नई दिल्ली. फेसबुक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डाटा के लोकल स्टोरेज को लेकर सरकार की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि डाटा लोकलाइजेशन से भारत फेसबुक और गूगल जैसी कंपनी पैदा नहीं कर सकता। फेसबुक के ग्लोबल अफेयर्स एंड कम्युनिकेशंस के वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग ने कहा डाटा के लोकल स्टोरेज से इंटरनेट की दुनिया टुकड़ों-टुकड़ों में बंट जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत में यदि ऐसा होता है, तो यह काफी शर्मनाक होगा और इसके बाद दूसरे देश भी डाटा के लोकल स्टोरेज की मांग करने लगेंगे।

नहीं दूर हो पा रहा सरकार के साथ फेसबुक का मतभेद

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वाट्सएप मैसेज ट्रेसेबिलिटी पर भी फेसबुक का सरकार के साथ मतभेद दूर नहीं हो पा रहा है। वाट्सएप मैसेज ट्रेसेबिलिटी का मतलब है कि वाट्सएप का कोई भी मैसेज सबसे पहले किसने भेजा और किस-किस ने इसे फॉरवार्ड किया, इसका पता लगाया जा सके। इसे लेकर क्लेग ने हाल में वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात भी की। उन्होंने हाल में गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आईटी और संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से इस विषय पर मुलाकात की। लेकिन मतभेद दूर नहीं हो पाया। गौरतलब है कि क्लेग 2010 से 2015 तक ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वाट्सएप पेमेंट सर्विस के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी का इंतजार है।

मेटाडाटा पर सहयोग के लिए तैयार है सोशल मीडिया कंपनी

क्लेग ने कहा कि फेसबुक मैसेज में क्या लिखा है, इसपर फिलहाल सहयोग करने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन वह मेटाडाटा पर सहयोग कर सकती है। मेटाडाटा का मतलब है कि किसने किसको मैसेज भेजा और किसने किसको फॉरवार्ड किया।

संदिग्ध व्यक्तियों के संदेशों पर भी सहयोग को तैयार

एक सूत्र ने कहा कि क्लेग ने प्रसाद के साथ हुई बैठक में उनके सामने यह प्रस्ताव रखा कि कंपनी सरकारी एजेंसियों द्वारा घोषित संदिग्ध व्यक्तियों की वाट्सएप संवाद गतिविधियों को ट्रैक कर सकती है। गौरतलब है कि वाट्सएप फेसबुक की कंपनी है। हालांकि कंपनी यह काम पिछली तिथि के प्रभाव से नहीं करना चाहती है, बल्कि आगे से ऐसा कर सकती है। कंपनी एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन को भी नहीं तोड़ना चाहती है, जो की ट्रेसेबिलिटी का मूल मुद्दा है।

सरकार की प्रस्तावित नीति में सोशल मीडिया के लिए मैसेज ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य

सरकार की प्रस्तावित नीति में सोशल मीडिया के लिए मैसेज ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य किया गया है। कानून व्यवस्था का मुद्दा पैदा करने वाले मामलों में ट्रेसेबिलिटी खास तौर से अनिवार्य है।

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