अर्थव्यवस्था /इस साल 4.6 फीसदी रह सकती है देश की विकास दर : फिच

  • ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने पहले 5.6 फीसदी विकास दर रहने की संभावना जताई थी

Moneybhaskar.com

Dec 20,2019 06:36:16 PM IST

नई दिल्ली. चालू कारोबारी साल में देश की विकास दर 4.6 फीसदी रह सकती है। यह अनुमान ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स का है। रेटिंग एजेंसी ने इससे पहले 5.6 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान दिया था। पिछली कुछ तिमाहियों में विकास दर में आई गिरावट और कारोबारी व उपभोक्ता मनोबल में गिरावट को देखते हुए रेटिंग एजेंसी ने देश का विकास अनुमान घटाया है।

बीबीबी(-) की रेटिंग बरकरार

एजेंसी ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को स्थिर आउटलुक के साथ बीबीबी(-) पर बरकरार रखा। एजेंसी ने कहा कि ऊंचा सरकारी कर्ज, कमजोर वित्तीय सेक्टर और गवर्नेंस इंडिकेटर्स व प्रतिव्यक्ति जीडीपी जैसे कुछ कमजोर संरचनात्मक पहलू भारत के कमजोर पक्ष हैं। लेकिन समकक्ष देशों के मुकाबले मध्य अवधि में भारत के विकास की क्षमता बेहतर है और विदेशी पूंजी भंडार काफी मजबूत स्थिति में है, जो नकारात्मक पक्षों को संतुलित करता है। इसे देखते हुए ही भारत की रेटिंग को बरकरार रखा गया है।

अन्य एजेंसियों के मुकाबले कम है फिच का विकास अनुमान

चालू कारोबारी साल के लिए फिच का विकास अनुमान मूडीज के 4.9 फीसदी और एशियाई विकास बैंक के 5.1 फीसदी से कम है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी विकास अनुमान को 6.1 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया है। फिच ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि कारोबारी साल 2020-21 में विकास दर 5.6 फीसदी और कारोबारी साल 2021-22 में यह 6.5 फीसदी रह सकती है।

3.3 फीसदी के लक्ष्य से पार जा सकता है वित्तीय घाटा

फिच ने कहा कि चालू कारोबारी साल में वित्तीय घाटा जीडीपी के 3.3 फीसदी लक्ष्य से पार जा सकती है। एक तरफ सरकार पर विकास को तेज करने का दबाव है, जिसके लिए सरकार को खर्च बढ़ाना होगा। दूसरी ओर वित्तीय घाटा कम करने का भी दबाव है, जिसके लिए खर्च घटाना होगा। यह सरकार के लिए उलझन वाली स्थिति होगी। वित्तीय घाटा अक्टूबर अंत में ही लक्ष्य के पार जा चुका है। इसके कारण पूरे कारोबारी साल सरकार का राजस्व दबाव में रहेगा।

2025 तक सरकार का कर्ज जीडीपी के 60 फीसदी की सीमा में आ सकने की उम्मीद नहीं

फिच के मुताबिक चालू कारोबारी साल में सरकार का साधारण कर्ज स्तर जीडीपी का 70.4 फीसदी और साधारण घाटे का स्तर जीडीपी के 7.5 फीसदी पर रहेगा। पूरी आशंका है कि सरकार मार्च 2025 तक जीडीपी के 60 फीसदी की साधारण सरकारी कर्ज सीमा के लक्ष्य को हासिल कर पाएगी। यह सीमा फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) कानून में तय की गई है।

आरबीआई की मुख्य ब्याज दर में 0.65 फीसदी और कटौती की उम्मीद

फिच ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2020 में आरबीआई अपनी मुख्य ब्याज दर में 0.65 फीसदी और कटौती कर सकता है। फरवरी 2019 के बाद आरबीआई अपनी मुख्य ब्याज दर में कुल 1.35 फीसदी कटौती कर चुका है। फिच ने कहा कि खाद्य कीमतों में अस्थायी बढ़ोतरी के कारण नवंबर में महंगाई दर 5.5 फीसदी दर्ज की गई। लेकिन मौजूदा माहौल में प्रमुख वस्तुओं की महंगाई दर (कोर इन्फ्लेशन) पर दबाव अधिक नहीं है।

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