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तेल का खेल / कोई भी पार्टी जीते इलेक्शन, नई सरकार के सामने होंगी 5 चुनौतियां 

कई मुश्किलें लेकर आएगी क्रूड की महंगाई

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नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव (Loksabha Polls) में कोई भी पार्टी को जीत मिले, लेकिन केंद्र में बनने वाली नई सरकार को कमान संभालते ही एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ नहीं रही हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इससे साफ है कि नई सरकार बनने के बाद कंज्यूमर्स को पेट्रोल-डीजल की कीमतों के रूप में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।

 


सरकार के सामने होंगी 5 चुनौतियां

1. तेल के लिए इंपोर्ट पर निर्भर भारत को ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ने से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इससे पेट्रोल और डीजल महंगा होगा।
2. भारत को तेल के इम्पोर्ट के लिए डॉलर में भुगतान करना होता है। ऐसे में महंगे तेल के लिए ज्यादा कीमत चुकाने से रुपया कमजोर होगा।
3. रुपया कमजोर होने और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने की आशंकाएं मजबूती हो जाती हैं। 
4. आरबीआई ब्याज दरों में बदलाव के लिए महंगाई पर खास तौर पर नजर रखती है। अगर महंगाई बढ़ती है तो आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने का फैसला कर सकता है, जिससे लोग विवेकाधीन खर्च में कमी लाने के लिए प्रोत्साहित हों।
5. वहीं ऑयल इम्पोर्ट बिल के मद में ज्यादा धनराशि के आवंटन से सरकार के खजाने पर बोझ बढ़ेगा। इससे सरकार का करंट अकाउंट डेफिसिट और बजट डेफिसिट दोनों बढ़ सकते हैं। इससे सरकार को सोशल सेक्टर की योजनाओं पर खर्च में कटौती करनी पड़ सकती है।

 

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चुनाव के बाद पड़े क्रूड की महंगाई का बोझ

हालात पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में क्रूड की महंगाई के बावजूद लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तेल कंपनियां रिटेल मार्केट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही हैं। माना जा रहा है कि क्रूड की बढ़ी कीमतों का बोझ सरकार के स्वामित्व वाली फ्यूल सप्लायर और रिटेल कंपनियां खुद उठा रही हैं। लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल को शुरू हुआ और 23 मई को नतीजे आ जाएंगे। 
ऐसे में चुनाव के नतीजे आने के बाद देश को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अतिरिक्त बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में चुनाव कोई भी दल जीते, लेकिन नई सरकार के लिए कमान संभालते ही कीमतें बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

 

 

 

 

चुनाव में बदल जाते हैं नियम

जापान और साउथ कोरिया जैसे बड़े एशियाई देशों में समय-समय पर रिटेल कीमतों में बदलाव किया जाता है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड की कीमतों के अनुरूप हो सकें। ऐसा भारत में भी होता है, लेकिन हर बार इलेक्शन के समय कई दिनों तक रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं होता है।

 

6 हफ्ते से लगभग स्थिर हैं पेट्रोल की कीमतें

उदाहरण के लिए भारत में बीते 6 हफ्ते क्रूड की कीमतें 9 डॉलर प्रति बैरल या लगभग 12 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं, जबकि इसकी तुलना में पेट्रोल की कीमतें महज 0.47 रुपए प्रति लीटर ही बढ़ी हैं। वहीं इस मसले पर सरकार के स्वामित्व वाले फ्यूल सप्लायर्स और रिटेलर्स ने कीमतों में बढ़ोतरी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार की तरफ से किसी प्रकार के दबाव पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं सरकार के प्रवक्ता ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी।

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