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  • In just three years, the company's turnover is three times more than the profit of 32 times more than profit

अजब-गजब /महज तीन साल में इस कंपनी का कारोबार साढ़े तीन गुना और मुनाफे में 32 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी

  • ऑस्मो कंपनी वेबसाइट पर बताती थी कि सरकारी एजेंसियां हमारे साथ  
  • मार्च 2015 की बैलेंस शीट में सालाना कारोबार केवल 39 लाख रुपए बताया जो मार्च 2018 की बैलेंस शीट में एक करोड़ 36 लाख रुपए हो गया 

money bhaskar

Apr 19,2019 11:38:02 AM IST

नई दिल्ली. सिर्फ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी ही कई गुना मुनाफा नहीं कमाती हैं बल्कि दूसरी कंपनियां भी महज एक साल में 32 गुना मुनाफा कमाने का दमखम रखती हैं। हालांकि यह बात अलग है कि मुनाफा सरकारी टेंडरों में कथित गड़बड़ी करके कमाया गया है। ई-टेंडर घोटाले में उलझी यह कंपनी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की है। नाम है ऑस्मो आईटी साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड।

बैलेंसशीट खंगाली तो आए चौंकाने वाले तथ्य

दैनिक भास्कर इंदौर के रिपोर्ट संजय गुप्ता ने कंपनी की बैलेंसशीट खंगाली। इसमें उन्हें चौंकाने वाले तथ्य मिले। तीन साल पहले महज कंपनी की बैलेंस शीट से उसकी तेज तरक्की और सरकारी संबंधों का पता चलता है। कंपनी की तीन साल पहले की मार्च 2015 की बैलेंसशीट में सालाना कारोबार केवल 39 लाख रुपए बताया गया, जो तीन साल में ही मार्च 2018 की बैलेंस शीट में करीब साढ़े तीन गुना बढ़कर एक करोड़ 36 लाख रुपए हो गया। इन तीन सालों में कंपनी का मुनाफा 32 गुना से अधिक बढ़ गया। कंपनी मार्च 2015 में केवल एक लाख सात हजार रुपए के शुद्ध मुनाफे में थी, लेकिन मार्च 2018 की बैलेंसशीट बताती है कि कंपनी को 34 लाख 82 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ।

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आयकर छापों के बाद सामने आई कंपनी की गड़बड़ी

बीते साल मप्र में शिवराज सरकार के वक्त ईटेंडिरंग घोटाले का पर्दाफाश हुआ। इसमें पाया गया कि कुछ कंपनियां और सरकारी अफसर सांठगांठ कर ई-टेंडर में छेड़छाड़ करते थे। शुरूआत में करीब 3 हजार करोड़ के 3 टेंडरों की गड़बड़ी सामने आई। इन्हें निरस्त कर दिया गया। विधानसभा चुनाव में भी यह मामला उठा। तब विपक्षी कांग्रेस ने सत्ता में आने पर घोटाले की जांच का वादा भी किया था। सत्ता में आने के बाद भी कांग्रेस ने इसकी फाइल दबाकर रखी थी। लेकिन हाल ही में जैसे ही मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहयोगियों के खिलाफ आयकर विभाग ने आयकर छापे डलवाए तो सीएम ने भी मोर्चा खोल दिया। ईओडब्ल्यू ने धड़ाधड़ एफआईआर कीं।

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कंपनी ने प्रोफाइल में बताई अपनी उपलब्धि

कंपनी के रिकॉर्ड से पता चलता है कि वरुण चतुर्वेदी और विनय चौधरी ने फरवरी 2012 में यह कंपनी बनाई थी। गठन के समय कंपनी की नेटवर्थ केवल 11 लाख रुपए थी, जो 2018 की बैलेंसशीट में 85 लाख रुपए हो गई। इसकी बैलेंसशीट एक करोड़ 48 लाख रपए की हो गई। कंपनी की प्रोफाइल में लिखा है कि वह तीन साल से तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

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वेबसाइट पर प्रचार : सरकारी संस्थान हमारे साथ

कंपनी के मुख्य ग्राहक सरकारी संस्थान और विभाग ही थे। खुद कंपनी ने अपनी प्रोफाइल में कई सरकारी संस्थानों का जिक्र करते हुए बताया है कि ये सभी हम पर विश्वास करते हैं।

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इन संस्थानों का जिक्र

इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, एमपी कोन लिमिटेड (टेक्निकल कंसल्टेंसी ऑर्गेनाइजेशन), वाटर रिर्सोसेस डिपार्टमेंट एमपी, पब्लिक हेल्थ एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट एमपी, भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) और एमपी ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ट्रायफेक)।

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तीन साल पहले एक और छोटी कंपनी बनाई थी


चतुर्वेदी और चौधरी ने नवंबर 2016 में एक और लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी बनाई थी। इसका नाम श्रीकॉन बिजनेस सॉल्यूशन रखा गया। इसका ऑफिस गोल्डन सिटी भोपाल में बताया गया है। यह कंपनी एक लाख रुपए की नेटवर्थ से खुली थी।

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