नया प्रावधान /किसानों को छह हजार रुपए की मदद लेने के लिए मिट्‌टी की जांच कराना होगा जरूरी

  • सरकार मृदा जांच प्रयोगशालाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी बढ़ाकर 60 लाख रुपये तक करने पर विचार कर रही है।
  • 12.04 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें करीब 8.47 करोड़ कार्ड वितरित हो गए हैं।

money bhaskar

May 29,2019 01:21:44 PM IST

नई दिल्ली. मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में खेती को फायदे का धंधा बनाने के लिए मिट्टी की टेस्टिंग अनिवार्य कर सकती है। कृषि मंत्रालय विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड को अनिवार्य बनाने की दिशा में एक प्रस्ताव लाने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर बुलाए गए एक सत्र में इस प्रस्ताव पर काफी माथापच्ची हुई और सालाना खरीफ सम्मलेन में भी इस विषय पर चर्चा हुई। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो इसमें पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाले लाभ को भी शामिल किया जा सकता है। इसके तहत सरकार सभी लघु एवं सीमांत किसानों को सालाना 6,000 रुपये की सहायता राशि देती है।

कैशबैक के लिए भी हो रही है समीक्षा

सरकार उन सभी किसानों को एक प्रतिशत कैशबैक भी देने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है, जो स्वास्थ्य कार्ड में सिफारिशों के आधार पर उर्वरक खरीदते हैं। उर्वरक कंपनियां यह कैशबैक दे सकती हैं और यह उनकी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) का हिस्सा हो सकता है।

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यह है मकसद

सरकार चाहती है कि किसानों की उपज बढ़ें। इसके लिए जरूरी है कि किसान मिट्‌टी की टेस्टिंग करवाकर उसमें बताए गए आधार पर उर्वरक का इस्तेमाल करें। इससे उर्वरक की खपत भी कम होगी और सही उर्वरक के इस्तेमाल से पैदावार भी बढ़ेगी। अभी सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी किसान मिट्‌टी की टेस्टिंग नहीं करवाने में परहेज बरतते हैं। इसलिए जब मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लाभकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा तो किसानों में जागरूकता भी आएगी।

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वित्तीय सहायता भी बढ़ेगी

सरकार मृदा जांच प्रयोगशालाओं को दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी बढ़ाकर 60 लाख रुपये तक करने पर विचार कर रही है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में एक रही है और अब अधिकारियों का कहना है कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी इसे और तवज्जो मिल सकती है। यह योजना दो चरणों में चलती है क्योंकि जांच के परिणाम एक अंतराल के बाद अपडेट करने पड़ते हैं।

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लक्ष्य 12 करोड़ कार्ड का, बने सिर्फ 8.47 करोड़ कार्ड

अब तक इस योजना में पहले चरण में 2.53 मृदा नमूने एकत्र किए गए और 10.73 करोड़ से अधिक नमूने वितरण किए गए। पहला चरण 2015 से 2017 तक चला। दूसरे चरण की शुरुआत मई 2017 से हुई, जिसमें केंद्र ने 2.73 करोड़ मिट्टी के नमूने एकत्र करने का लक्ष्य रखा था। अब तक 98 प्रतिशत नमूने एकत्र किए जा चुके हैं, जबकि 2.51 करोड़ नमूनों की जांच हो चुकी है। जहां तक कार्ड के वितरण की बात है तो 12.04 करोड़ कार्ड वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें करीब 8.47 करोड़ कार्ड वितरित हो गए हैं। वर्ष 2016-17 में केंद्र ने इस योजना के लिए 133.67 करोड़ रुपये रकम मंजूर की थी, जो 2017-18 में बढ़कर 152.77 करोड़ रुपये हो गई। 2018-19 में यह राशि बढ़कर 237.40 करोड़ रुपये हो गई।

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