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  • Hariom Nautiyal left his successful career to start a business in village

इंजीनियरिंग छोड़ गांव में शुरू की डेयरी, हर महीने होती है 2 लाख की इनकम

इंजीनियरिंग छोड़ गांव में शुरू की डेयरी इंजीनियरिंग छोड़ गांव में शुरू की डेयरी
आसान नहीं था गांव में बिजनेस शुरू करना आसान नहीं था गांव में बिजनेस शुरू करना
शुरुआत में सिर्फ 270 रुपए होती थी कमाई शुरुआत में सिर्फ 270 रुपए होती थी कमाई
आज ये सारे काम करते हैं हरिओम आज ये सारे काम करते हैं हरिओम
स्‍वरोजगार को दे रहे बढ़ावा स्‍वरोजगार को दे रहे बढ़ावा

Moneybhaskar

May 22,2017 05:39:00 PM IST
नई दिल्‍ली। चाह हो तो राह मिल ही जाती है। ये साबित कर दिखाया है उत्‍तराखंड के हरिओम नौटियाल ने। अपने गांव में कुछ करने की चाहत रखने वाले नौटियाल ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर अपने सफल करियर को त्‍याग कर गांव में डेयरी बिजनेस शुरू किया। आज इसी डेयरी बिजनेस के चलते वह हर महीने 1.5 लाख से 2 लाख रुपए तक की कमाई करते हैं।
देहरादून के रानी पोखरी स्थित बड़कोट गांव में अपने घर से हरिओम ने जिस डेयरी बिजनेस की शुरुआत की थी, आज वह सिर्फ डेयरी न रहकर पॉल्‍ट्री, कंपोस्टिंग और जाम-अचार बनाने की फैक्‍ट्री शुरू करने तक पहुंच गया है। अपने इस बिजनेस के बूते वह न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि इसके जरिए वह हजारों लोगों को शहर छोड़कर गांव में बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अपने काम के लिए सुर्खियां बटोर चुके हरिओम ने Moneybhaskar से सॉफ्टवेयर इंजीनियर से सफल बिजनेसमैन बनने की कहानी साझा की।
आगे जानिए – क्‍यों हरिओम नौटियाल ने सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी छोड़ गांव की राह पकड़ी। साथ ही जानिए कि कैसे इस फैसले ने उनके जीवन को नई राह दी।
आसान नहीं था गांव में बिजनेस शुरू करना हरिओम नौटियाल ने moneybhaskar को बताया कि उन्होंने दिल्ली और बेंगलुरु में करीब 4 साल सॉफ्टवेयर इंजीनियर व रिसर्चर के तौर पर काम किया। इस दौरान उनकी 70 से 80 हजार रुपए की अर्निंग हो जाती थी, लेकिन वह गांव में कुछ करना चाहते थे। हरिओम ने बताया, ‘इतनी अच्छी नौकरी छोड़कर गांव में बिजनेस शुरू करने का फैसला आसान नहीं था। लोगों ने भी मुझे अपनी नौकरी छोड़कर गांव न आने की हिदायत दी, लेकिन मैंने ठान ली थी और गांव पहुंचकर डेयरी बिजनेस शुरू कर दिया। इस तरह 4 साल का सफल करियर छोड़कर और अपनी जमा पूंजी लेकर हरिओम अपने गांव बड़कोट पहुंचे और यहां उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर डेयरी बिजनेस शुरू किया। आगे जानिए ; शुरुआत में होती थी सिर्फ 270 रुपए कमाईशुरुआत में सिर्फ 270 रुपए होती थी कमाई हरिओम बताते हैं कि जब उन्होंने गांव में परिवार के साथ मिलकर डेयरी बिजनेस की शुरुआत की, तो उन्हें प्रतिदिन सिर्फ 9 रुपए का फायदा होता था। इस तरह कई महीनों तक उन्होंने सिर्फ 270 रुपए हर महीने कमाई की। अच्छी कमाई न होने के बाद भी हरिओम ने हौसला नहीं हारा और उन्होंने डेयरी बिजनेस के साथ अपनी सेविंग्स से मुर्गी पालन भी शुरू कर दिया। इससे उनके हालात थोड़े सुधरने लगा और धीरे-धीरे उनका बिजनेस ग्रो करने लगा। हरिओम कहते हैं, ‘जब मैंने गांव में बिजनेस की शुरुआत की, तो कुछ रिश्तेदार इसलिए नाराज हो गए, क्योंकि मैं एक ब्राह्मण परिवार से होकर चिकन और अंडे का कारोबार कर रहा था, लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ ठीक हो गया।’; आगे जानिए ; आज ये सारे काम करते हैं हरिओमआज ये सारे काम करते हैं हरिओम एक कमरे से डेयरी बिजनेस शुरू करने वाले हरिओम के पास आज लगभग हर नस्ल की गाय है। डेयरी व मुर्गी पालन के अलावा आज वह कंपोस्टिंग, मशरूम की खेती, बकरी पालन समेत कई काम करते हैं। अब उन्होंने अचार और जाम बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। वह उत्तराखंड में मिलने वाले फल माल्टा और बुरांस जैसे अन्य प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर यहां के गांवों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वह जल्द ही उत्तराखंड के दूसरे गांवों में अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके लिए वह मिनी स्टोर खोल रहे हैं। धन्यधेनु के नाम से अपने बिजनेस मॉडल को आगे बढ़ा रहे हरिओम गांव में फ्री होम डिलीवरी भी करते हैं। आगे जानिए ; स्वरोजगार को दे रहे बढ़ावास्वरोजगार को दे रहे बढ़ावा हरिओम नौटियाल अब न सिर्फ अपना बिजनेस संभाल रहे हैं, बल्कि वह शहर छोड़कर गांवों में काम करने के इच्छुक लोगों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मैं लोगों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित करता हूं। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग और जरूरी जानकारी भी मैं अपनी तरफ से देने के लिए तैयार रहता हूं। हरिओम कहते हैं कि उत्तराखंड के हजारों गांव खाली हो गए हैं और गांव भी दिन-प्रतिदिन खाली होते जा रहे हैं। ऐसे में पलायन रोकने का सबसे अच्छा तरीका स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।
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इंजीनियरिंग छोड़ गांव में शुरू की डेयरीइंजीनियरिंग छोड़ गांव में शुरू की डेयरी
आसान नहीं था गांव में बिजनेस शुरू करनाआसान नहीं था गांव में बिजनेस शुरू करना
शुरुआत में सिर्फ 270 रुपए होती थी कमाईशुरुआत में सिर्फ 270 रुपए होती थी कमाई
आज ये सारे काम करते हैं हरिओमआज ये सारे काम करते हैं हरिओम
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