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    GST लागू होने से GDP को मजबूती मिलेगी, नई नौकरियां पैदा होंगी: एक्सपर्ट्स

    नई दिल्ली.    देश में 1 जुलाई से जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लागू होने से इकोनॉमिक डेवलपमेंट की रफ्तार तेज होगी। महंगाई काबू में रहेगी। इकोनॉमी का एक्सपैन्शन (विस्‍तार) होने से देश में नई नौकरियां पैदा होंगी और सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा। टैक्‍स के मोर्चे पर सिस्टम आसान होने से देश में कारोबार करना आसान होगा। जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के आउटकम पर क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी और जाने-माने इकोनामिस्‍ट मोहन गुरुस्‍वामी ने moneybhaskar.com से एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत में यह कहा। इकोनॉमी के 5 अहम इंडिकेटर्स पर दोनों एक्‍सपर्ट्स की राय... 
     
    1. महंगाई
     
    डीके जोशी
    - अब तक जिन आइटम्स के टैक्‍स के रेट सामने आए हैं, उससे लगता है कि जीएसटी लागू होने से देश में महंगाई नहीं बढ़ेगी।
     
    मोहन गुरुस्‍वामी
    - जीएसटी लागू होने से महंगाई थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन इकोनॉमी पर इसका निगेटिव असर होगा। ऐसे में इकोनॉमी बढ़ेगी। ऐसा इसलिए है कि महंगाई बढ़ने से प्रोडक्शन बढ़ता है।
     
    2. जीडीपी
     
    डीके जोशी
    - जीएसटी लागू होने से अगले दो तीन साल में जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) पर इसका पॉजिटिव असर दिखाई देगा। इससे जीडीपी बढ़ेगी।
    - हालांकि कम वक्त में जीएसटी लागू होने से इकोनॉमी में दिक्कतें भी दिख सकती हैं।
     
    मोहन गुरुस्‍वामी
    - जीएसटी लागू होने से प्रोडक्शन बढ़ेगा। इकोनॉमिक एक्टिविटीज तेज होंगी। ऐसे में जीडीपी में भी इजाफा होगा।  
     
    3. नौकरियां
     
    डीके जोशी
    - लंबी वक्त में जीएसटी लागू होने से नई नौकरियां पैदा होंगी।
    - जीएसटी की वजह से टैक्‍स से जुड़ी दिक्कतें खत्‍म होंगी और मैन्‍युफैक्‍चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
     
    मोहन गुरुस्‍वामी
    - जीएसटी लागू होने से पूरी इकोनॉमी मजबूत होगी। प्रोडक्शन बढ़ेगा। ऐसे में नई नौकरियां भी पैदा होंगी।
     
    4. रेवेन्यू
     
    डीके जोशी
    - जीएसटी से इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी। ऐसे में सरकार को ज्‍यादा टैक्‍स मिलेगा। यानी सरकार की रेवेन्यू के मोर्चे पर स्थिति मजबूत होगी।
     
    मोहन गुरुस्‍वामी
    - जीएसटी लागू होने से इकोनॉमी की रफ्तार तेज होगी। ऐसे में रेवेन्यू भी बढ़ेगा।
    - नए सिस्टम में केंद्र और राज्‍य सरकारें रेवेन्यू शेयर करेंगी। इससे केंद्र और राज्‍य सरकारों दोनों को फायदा होगा।
     
    5. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
     
    डीके जोशी
    - जीएसटी का अहम मकसद टैक्‍स सिस्टम को आसान बनाना है। ऐसे में जीएसटी लागू होने से कारोबारियों को टैक्‍स के मोर्चे पर सुविधा होगी।
    - ऐसे में कह सकते हैं कि बिजनेस करना आसान होगा।
     
    मोहन गुरुस्‍वामी
    - जीएसटी लागू होने से मल्‍टीपल टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर खत्‍म होगा। यानी टैक्‍स के मोर्चे पर कारोबारियों को सहूलियत होगी।
    - ऐसे में उनके लिए टैक्‍स रूल्स पर अमल करना आसान होगा। यानी कारोबार करने में सहूलियत होगी।
     
    क्या राज्यों को नुकसान होगा?
    - इकोनॉमिस्‍ट डीएच पई पनंदिकर ने बताया कि GST से मैन्‍युफैक्‍चरिंग स्‍टेट घाटे में रहेंगे, वहीं कंज्‍यूमर स्‍टेट को फायदा होगा। महाराष्‍ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब और वेस्‍ट बंगाल मैन्‍युफैक्‍चरिंग स्‍टेट में आते हैं। इसकी वजह यह है कि इन राज्यों में कंज्यूमर गुड्स के प्लांट्स ज्यादा हैं। 
    - उन्होंने बताया कि यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू-कश्‍मीर ऐसे राज्‍य हैं जिनकी इकोनॉमी मैन्‍युफैक्‍चरिंग पर बेस्‍ड नहीं है। पनंदिकर के मुताबिक GST लागू होने के बाद किसी भी प्रोडक्‍ट पर टैक्स यूजर पर लगेगा। मतलब अगर कोई प्रोडक्‍ट गुजरात में बनता है और यूपी में बिकता है तो टैक्‍स यूपी में लगेगा। ऐसा होने पर तमिलनाडु को सालाना करीब 3,500 करोड़ रुपए, महाराष्ट्र को करीब 14,000 करोड़ रुपए और गुजरात को 10,800 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। इस नुकसान की भरपाई केंद्र करेगा। 
     
    GSTकाउंसिल की मीटिंग के अहम फैसले
    -  1,212 वस्‍तुओं के टैक्‍स रेट तय।
    -  एजुकेशन और हेल्थ सेक्‍टर जीएसटी के दायरे से बाहर।
    -  ज्यादातर सर्विसेज पर 12 से 18% टैक्‍स रेट।
    -  फाइनेंशियल सर्विसेज महंगी हुई। 18% टैक्‍स रेट।
    - गोल्‍ड पर टैक्‍स रेट का फैसला टला। 3 जून की काउंसिल की मीटिंग में होगा फैसला।  
     
    क्या है GST?
    - GST का मतलब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स है। इसको केंद्र और राज्‍यों के 17 से ज्‍यादा इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के बदले में लागू किया जाएगा। ये ऐसा टैक्‍स है, जो देशभर में किसी भी गुड्स या सर्विसेज की मैन्‍युफैक्‍चरिंग, बिक्री और इस्‍तेमाल पर लागू होगा।
    - इससे एक्‍साइज ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), स्टेट के सेल्स टैक्स यानी वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैंप ड्यूटी, टेलिकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या बिक्री और गुड्स के ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।
    - सरल शब्‍दों में कहें ताे जीएसटी पूरे देश के लिए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स है, जो भारत को एक समान बाजार बनाएगा। जीएसटी लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी गुड्स एक ही कीमत पर मिलेंगे। अभी एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसकी वजह अलग-अलग राज्यों में लगने वाले टैक्स हैं। इसके लागू होने के बाद देश बहुत हद तक सिंगल मार्केट बन जाएगा।
     

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