मनी भास्कर खास /अगले 100 दिनों में बैंकिंग सेक्टर में सुधार से लेकर वस्तुओं की लागत कम करने पर होगा एक्शन

  • वित्त मंत्रालय से लेकर वाणिज्य मंत्रालय तक एजेंडा तैयार करने में जुटे।

Money Bhaskar

May 24,2019 02:23:24 PM IST

मनी भास्कर. नई दिल्ली।

17वीं लोकसभा का शपथ ग्रहण कार्यक्रम पूरा होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रालयों के अफसरों को काम पर लगा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रालयों से अगले 100 दिनों के कामकाज का एजेंडा देने के लिए कहा है। मंत्रालय की तरफ से इसकी तैयारी भी शुरू हो गई है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगले 100 दिनों के प्रमुख एजेंडा में बैंकिंग सेक्टर एवं दिवालिया कानून में बदलाव शामिल हैं। वहीं जीएसटी की दरों को लेकर भी अहम बैठक बुलाई जा सकती है। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए निर्माण लागत को कम करने के उपाय भी 100 दिनों के एजेंडा में शामिल होगा। सूत्रों के मुताबिक मोदी के नए मंत्रिमंडल के शपथग्रहण का काम पूरा होते ही एजेंडा के मुताबिक कामकाज शुरू हो जाएगा।

बैंकिंग सेक्टर में हो सकते हैं बड़े बदलाव

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार के पिछले पांच साले के दौरान सफाई का काम किया गया अब विकास का काम होगा। उन्होंने बताया कि नकदी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए बैंकिंग सेक्टर में कई प्रकार के बदलाव किए जा सकते हैं। वहीं बैंकों की गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) को कम करने को लेकर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। बड़े कर्ज को लेकर भी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार हो रहा है। आर्थिक मामलों के मंत्रालय की तरफ से दिवालिया कानून में बदलाव को 100 दिनों के एजेंडा में शामिल किया जा रहा है। अभी फर्म या व्यक्तिगत रूप से कोई व्यक्ति खुद को दिवालिया घोषित नहीं कर सकता है। इस कानून को लाने की तैयारी की जा रही है। चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) एवं दिवालिया कानून विशेषज्ञ मनीष गुप्ता ने मनी भास्कर को बताया कि दिवालिया कानून में बदलाव के प्रारूप तैयार कर लिए गए हैं, बस उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है।

ब्याज दरों में कटौती कर सकता है RBI

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक अगले 100 दिनों के एजेंडा में मुख्य रूप से निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की लागत को कम करने के मुद्दे को शामिल किया जा रहा है ताकि निवेश में बढ़ोतरी हो सके। मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी करके ही रोजगार सृजन में इजाफा हो सकता है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग की लागत को कम करने के लिए आरबीआई फिर से ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। औद्योगिक संगठन भी लगातार इस पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। कृषि मंत्रालय की तरफ से किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने को लेकर एजेंडा तैयार किया जा रहा है।

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