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रिपोर्ट /आर्थिक मुद्दों पर नहीं, हिन्दू राष्ट्रवाद पर ही रहेगा सरकार का ध्यान: ईआईयू

  • सरकार द्वारा चलाए जा रहे बड़े प्रोजेक्ट्स के विकास में बाधा बनेंगे विपक्षी नेतृत्व वाले राज्य
  • इससे देश के विकास की क्षमता और प्रभावित होगी

Moneybhaskar.com

Jan 08,2020 05:10:00 PM IST

नई दिल्ली. देश में चल रही आर्थिक मंदी के बावजूद इस बात की बेहद कम उम्मीद है कि सरकार अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने के लिए कोई सुधार लागू करेगी। इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट का कहना है कि, इस बात की उम्मीद ज्यादा है कि हालिया विधानसभा चुनावों में हार का भरपाई करने के लिए हिन्दू राष्ट्रवाद पर ही अपना फोकस करेगी।

विपक्षी दल भी डालेंगे विकास में बाधा

इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी थी और अगली तिमाही में यह 4.5 फीसदी रही। लंदन के इकोनॉमिस्ट ग्रुप की बिजनेस यूनिट इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट के मुताबिक, राजकोषीय प्रतिबंधों और बढ़ती कीमतों का दबाव शॉट-टर्म में राजकोषीय और आर्थिक वृद्धि में बाधा डालता रहेगा। वहीं इस बात की भी उम्मीद है कि विपक्षी नेतृत्व वाले राज्य, सरकार द्वारा चलाए जा रहे बड़े प्रोजेक्ट्स के विकास को बाधित करते रहेंगे, जिससे देश के विकास की क्षमता और प्रभावित होगी।

हिन्दुत्व का सहारा लेगी पार्टी

लंबे समय से चली आ रही आर्थिक सुस्ती के बावजूद इस बात की उम्मीद बहुत कम है कि सरकार जरूरी आर्थिक सुधारों को लागू करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-लोकप्रिय आर्थिक उपायों को लागू करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी अपनी लोकप्रिय हिन्दू राष्ट्रवाद की थीम पर ही ध्यान देगी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है, जिससे बाहर आने के लिए पार्टी हिन्दुत्व का सहारा लेगी।

आत्मरक्षात्मक तरीके से व्यवहार करती है सरकार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार ने बीते महीनों में जारी हुई कुछ आधिकारिक रिपोर्ट्स में पेश हुए खराब आर्थिक डाटा को लेकर आत्मरक्षात्मक तरीके से व्यवहार किया है और आलोचकों और इन रिपोर्ट्स की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। व्यापार जगत के बड़े लोगों की तरफ से अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आलोचना होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेतावनी दी कि ऐसी बातों से राष्ट्रहित को नुकसान पहुंच सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक स्लोडाउन से निपटने की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के समाज को बांटने वाले मुद्दों पर ही केंद्रित रहने की संभावना है, जिससे उन्हें राजनीतिक फायदा मिलने की उम्मीद है।


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