GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर किया 7-7.5%, महंगाई रहेगी 6% पर

Economy Team

Dec 18,2015 03:02:00 PM IST
नई दिल्‍ली। खराब मानसून के कारण कृषि उत्‍पादन को लेकर पैदा हुए जोखिम ने मोदी सरकार की ऊंची विकास दर की उम्‍मीदों को झटका दिया है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेश छमाही आर्थिक समीक्षा में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 7 से 7.5 फीसदी के बीच कर दिया, जबकि पहले यह अनुमान 8 और 8.1 फीसदी के बीच था। हालांकि इस फाइनेंशियल ईयर में महंगाई का टारगेट हासिल करने का भरोसा जताते हुए इसके 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। सरकार ने भले ही ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है, लेकिन यह भी हासिल हो जाता है तो भारत सबसे ज्यादा तेजी से उभरती हुई इकोनॉमी बना रहेगा।
सरकार को उम्‍मीद है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद वह चालू वित्‍त वर्ष के लिए 3.9 फीसदी के फिस्‍कल डेफिसिट और 2.8 फीसदी के रेवेन्‍यू घाटे के लक्ष्‍य को हासिल कर लेगी। बीते 12 महीने से लगातार एक्‍सपोर्ट में जारी गिरावट पर सरकार का अनुमान है कि वित्‍त वर्ष 2016-17 में इसमें सुधार होगा। जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कटौती की मुख्‍य वजह कमजोर मानूसन के कारण कृषि उत्‍पादन में आई कमी है। समीक्षा में सरकार ने कहा है कि ग्रोथ की तुलना में टैक्‍स कलेक्‍शन की स्थिति बेहतर है। इनडायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन से अच्‍छा है।
अभी वास्‍तविक नहीं है 8.0-8.5% की जीडीपी ग्रोथ: CEA
सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (सीईए) अरविंद सुब्रमण्‍यन ने कहा है कि 2015-16 में 8.0-8.5 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ हासिल करना मुमकिन नहीं है। मानसून बेहतर रहने का अनुमान गलत रहा, जिसके चलते एग्री प्रोडक्‍शन में कमी आएगी। उन्‍होंने कहा कि महंगाई में नरमी है और रुपए में स्थिरता है। सुब्रमण्‍यन ने कहा कि इकोनॉमी में मिले-जुले संकेत दिखाई दे रहे हैं। रिकवरी की ताकत को फिलहाल डिफाइन करना मुश्किल है। भारत की इकोनॉमी को कंजम्‍प्‍शन और पब्लिक इन्‍वेस्‍टमेंट से ताकत मिल रही है। सरकार बिना खर्चों में कटौती किए फिस्‍कल डेफिसिट के लक्ष्‍य को हासिल कर लेगी। इकोनॉमी फिलहाल किसी भी तरह के झटके से निपटने के लिए तैयार है।
महंगाई 6%, फिस्‍कल डेफिसिट 3.9% रहने का अनुमान
2015-16 की छमाही समीक्षा में सराकर ने रिटेल महंगाई के 6 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है। कमजोर मानसून के चलते रिटेल महंगाई में तेजी आई है और वह नवंबर 2015 में 5.7 फीसदी रही। सरकार का कहना है कि अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार हो रहा है, लेकिन चुनौतियां भी बनी हुई हैं। वित्‍त मंत्रालय की ओर जारी समीक्षा में कहा गया है कि सरकार चालू वित्‍त वर्ष में फिस्‍कल डेफिसिट के 3.9 फीसदी (जीडीपी) का लक्ष्‍य हासिल कर लेगी। वहीं, रेवेन्‍यू डेफिसिट के 2.8 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया गया है। इस साल बजट में वित्‍त मंत्री ने चालू वित्‍त वर्ष में फिस्‍कल डेफिसिट 3.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था, जो 2014-15 में 4 फीसदी था।
7वें पे-कमीशन का घाटे पर होगा असर
सरकार ने मध्‍य छमाही समीक्षा में कहा है कि सातवें पे कमीशन की सिफारिशों से केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में होने वाली बढ़ोतरी का प्रतिकूल असर फिस्‍कल डेफिसिट पर पड़ेगा। पे-कमीशन ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वर्तमान पे-पैकेज पर 23.55 फीसदी हाइक करने की सिफारिश की है। पे-कमीशन की सिफारिशों को लागू करने से सेंट्रल गवर्नमेंट के 47 लाख इम्‍पलॉई और 52 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। ये सिफारिशें लागू होने से फाइनेंशियल ईयर 2016-17 में सरकार पर 1.02 लाख करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा।
अभी नहीं बढ़ेंगी तेल कीमतें, फेड के झटके से निपटने को तैयार
छमाही आर्थिक समीक्षा में सरकार ने कहा है कि अभी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है। देश की इकोनॉमी बाहरी झटकों से निपटने के लिए तैयार है। हाल में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्‍याज दरों में बढ़ोत्‍तरी से होने वाले असर से निपटने के लिए भारत तैयार है।
2016-17 में आएंगी मुश्किलें
छमाही समीक्षा में सरकार ने कहा है कि वित्‍त वर्ष 2016-17 के लिए फिस्‍कल आउटलुक चुनौतीपूर्ण रहेगा। सरकार ने मीडियम टर्म में ग्रोथ को बढ़ाने के लिए सप्‍लाई साइड में रिफॉर्म की जरूरत है। जीडीपी ग्रोथ में मामूली गिरावट का दबाव सरकार के रेवेन्‍यू पर पड़ेगा। सरकार ने कहा है कि महंगाई में मामूली तेजी रहेगी। सरकार ने समीक्षा में कहा है कि अभी रिकवरी की रफ्तार धीमी है। डिसइन्‍वेस्‍टमेंट की रफ्तार नहीं पकड़ने से फिस्‍कल लक्ष्‍य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
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