नीलामी /एयर इंडिया समेत कई सरकारी कंपनियों की प्राइम लोकेशन की प्रॉपर्टियां बेचकर सरकार भरेगी अपना खजाना

  • वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि कंपनियां इन संपत्तियों के संभावित खरीदारों और नीलामी लगाने वालों से बातचीत शुरू करें। 
  • सरकार ने हिस्सेदारी बेचने के लिए ऐसी 35 कंपनियों की पहचान पहले ही कर ली है। इनमें एयर इंडिया, पवन हंस, बीईएमएल, आदि शामिल हैं।

money bhaskar

Apr 22,2019 11:33:49 AM IST

नई दिल्ली. जिन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी बेची जानी है, उन्हें अपने मुख्य व्यवसाय के उपयोग में नहीं आ रही संपत्तियों की सूची बनाने का आदेश दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि ये कंपनियां इन संपत्तियों के संभावित खरीदारों और नीलामी लगाने वालों से बातचीत शुरू करें। सरकार ने हिस्सेदारी बेचने के लिए ऐसी 35 कंपनियों की पहचान पहले ही कर ली है। इनमें एयर इंडिया, पवन हंस, बीईएमएल, आदि शामिल हैं। इन कंपनियों को अपनी सभी संपत्तियों पर साफ-सफाई रखने को भी कहा गया है ताकि उचित कीमत मिल सके। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों के विनिवेश के जरिये 90,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष में 85,000 करोड़ रुपये था।

बड़ी मात्रा में बाजार में आएंगी प्रॉपर्टी

सरकारी कंपनियों के पास लगभग सभी बड़े शहरों में राज्य सरकारों से प्राइम लोकेशन पर संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों को बाजार मूल्य करोड़ों रुपए में है। इन जमीनों पर कर्मशियल डेवलपमेंट से शहर की सूरत बदल सकती है। वहीं निजी कंपनियों के लिए अहम लोकेशन पर प्रॉपर्टी मिलने का रास्ता साफ हो सकेगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि जिन राज्य सरकारों ने जमीन लीज पर दी है क्या वे इसे बेचने की अनुमति देंगी।

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फरवरी में ही हो गया था फैसला

फरवरी में मंत्रिमंडल के एक फैसले के बाद निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) ने इस हफ्ते की शुरुआत में दिशा-निर्देश दिए थे। साथ ही सरकार ने पहले से ही बिक्री के लिए लगभग 35 कंपनियों की पहचान की है। इनमें एयर इंडिया, पवन हंस, बीईएमएल, स्कूटर्स इंडिया, भारत पंप कंप्रेशर्स, और प्रमुख इस्पात कंपनी- ‘सेल’ की भद्रावती, सलेम और दुर्गापुर इकाइयां शामिल हैं। जिन अन्य कंपनियों की एकमुश्त बिक्री के लिए मंजूरी दी गई है, उसमें हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन, हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट, एचएलएल लाइफ केयर, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्रिज एंड रूफ इंडिया, एनएमडीसी का नागरनार इस्पात संयंत्र और सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और आईटीडीसी की इकाइयां शामिल हैं।

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एयर इंडिया का कर्ज उतारने के लिए बनाया एसपीवी

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) को बिक्री के समय बेहतर प्राप्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी संपत्तियों की उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। विनिवेश की प्रक्रिया से गुजर रहे एयर इंडिया के मामले में सरकार ने पहले से ही एक विशेष उद्देशीय कोष (एसपीवी) – एयर इंडिया एस्सेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) बनाया है। सरकार ने एयर इंडिया के कुल 55,000 करोड़ रुपये कुल कर्ज में से 29,000 करोड़ रुपये के कर्ज को एआईएएचएल को अंतरित कर दिया है। इसके अलावा, चार सहायक कंपनियों- एयर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज (एआईएटीएसएल), एयरलाइन अलाइड सर्विसेज (एएएसएल), एयर इंडिया इंजीनिरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) और होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एचसीआई) की बिक्री से प्राप्त आय को भी एआईएएचएल को हस्तांतरित किया जायेगा। इसके अलावा, गैर-कोर परिसंपत्तियां – पेंटिंग और कलाकृतियों के साथ ही साथ राष्ट्रीय विमानन कंपनी की अन्य गैर-परिचालन वाली संपत्तियों को भी एसपीवी को हस्तांतरित कर दिया जायेगा।

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