मदद /किसानों और ट्रेडर्स की आय बढ़ाने के लिए जम्मू-कश्मीर में 8,000 करोड़ रुपए निवेश करेगी सरकार

  • बाजार में अपना माल न बेचने की आतंकियों की धमकी के चलते किसानों को हो रहा करोड़ों का नुकसान
  • किसानों से सेब खरीद कर सीधे उनके खाते में पैसे ट्रांसफर करेगी सरकार, बनाएगी गुणवत्ता जांचने के लिए कमेटी

Moneybhaskar.com

Sep 11,2019 05:42:43 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सेब और ड्राई फूट के किसानों और व्यापारियों की आय बढ़ाने और घाटी में व्यापार को पुनर्जीवित करने के लिए 8,000 करोड़ रुपए निवेश करने जा रही है। इसमें से 2,000 करोड़ रुपयों से सीधे-सीधे सेब किसानों से सेब खरीदे जाएंगे। कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद वहां पर किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है। घाटी से माल दिल्ली तक लाने के लिए न तो किसानों के पास साधन हैं और न उनके उत्पादों का सही दाम लग रहा है। ऐसे में सरकार घाटी के किसानों से तकरीबन 12 लाख मीट्रिक टन सेब खरीदने की योजना बना रही है।

नाफेड खरीदेगा 60 फीसदी सेब

केंद्र सरकार द्वारा संचालित नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED, नाफेड) कश्मीर में उत्पादित सेबों में से 60 फीसदी को खरीदेगा। दरअसल आतंकवादियों ने सेब की खेती करने वाले किसानों को धमकाया है कि वे अपना माल बाजार में न बेचें। ऐसे में किसानों का व्यापार चौपट हो रहा है। उन्हें करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। कश्मीर में जिस सेब की एक पेटी 800 से 900 रुपए के बीच बिकती थी, अब वह 150 रुपए, 200 या ज्यादा से ज्यादा 300 रुपए के दाम में जा रही है।

बनाई जाएगी एक कमेटी

मामले की खबर रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, स्पेशल मार्केट इंटरवेंशन प्राइस स्कीम (MISP) के तहत नाफेड किसानों से ग्रेड ए, बी और सी के सेब खरीदेगा और इसका भुगतान किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर सुविधा के तहत 48 घंटों में किसानों के अकाउंट में पैसा आ जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, सेबों का दाम तय करने के लिए हर मंडी के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी जो सेबों की गुणवत्ता और वैराइटी के हिसाब से उनकी कीमत तय करेगी। इसके अलावा पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज और अन्य संबंधित खर्चों का दाम भी तय करेगी।

लाखों टन फ्रूट व ड्राई फ्रूट का होता है उत्पादन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल अखरोट में से 91 फीसदी कश्मीर से आता है। बादाम उत्पादन में कश्मीर की हिस्सेदारी 90 फीसदी, सेब में 70 फीसदी, चेरी और केसर में 90 फीसदी हिस्सेदारी है। इनकी सालाना बिक्री तकरीबन 7000 करोड़ रुपए की होती है। हर साल कुल पैदावार तकरीबन 23.535 लाख टन होता है। इसमें से सेब, चेरी और नाशपाति की हिस्सेदारी 20.35 लाख टन होती है, जबकि ड्राई फ्रूट की हिस्सेदारी 2.80 लाख टन रुपए रहती है। घाटी की तकरीबन 3.3 लाख हेक्टेयर जमीन को फल व ड्राई फ्रूट बेचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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