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जेनरिक दवा न लिखने पर डॉक्टरों पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई, सख्त कानून की है तैयारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एजेंडा इस समय जेनरिक दवाओं को उपलब्धता बढ़ाना है। इसके लिए उन्होंने कानून लाने की भी बात कही है। जिससे कि डॉक्टर अपनी पर्ची पर जेनरिक दवाएं ही लिखे। इसके लिए हेल्थ मिनिस्ट्री ने भी तैयारी शुरू कर दी है। नए कानून में कई ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे डॉक्टर जेनरिक दवाएं लिखे।
 
क्या है तैयारी
 
हेल्थ मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने moneybhaskar.com  को बताया कि मिनिस्ट्री में इसके लिए डिस्कशन शुरू हो चुका है। नए कानून में ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिससे डॉक्टर की जवाबदेही तय की जा सके। साथ ही कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों को सख्त एक्शन भी किया जा सके। अधिकारी के अनुसार इसके तहत डॉक्टर पर निगरानी रखने के साथ-साथ जेनरिक दवाएं नहीं लिखने पर एक्सप्लेशन सहित सजा जैसे प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि फाइनल नियम क्या होंगे, इस पर अभी समय लगेगा।
 
क्या होती है जेनरिक दवा
 
कोई भी दवा कंपनी जब किसी दवा को बनाती है, तो उसका एक फॉर्म्युला होता है। जिसे शुरूआत के 20 साल पेटेंट मिला होता है। यानी वह दवा केवल वहीं कंपनी बना सकती है, जिसने उसे ईजाद किया है। हालांकि 20 साल बाद उस दवा का फॉर्म्युला पब्लिक हो जाता है। उसे कोई भी कंपनी दवा बना सकती है। जिसे जेनरिक कहा जाता है। फॉर्म्युला पब्लिक होने की वजह से यह दवा कई गुना सस्ती हो जाती है। केंद्र सरकार यहीं चाहती है कि जो दवाएं पेटेंटेड नहीं है, उनको जेनरिक के जरिए डॉक्टर पर्ची पर लिखे। जिससे लोगों को सस्ती दवाएं मिल सके।
 
क्या करते हैं डॉक्टर खेल
 
अभी डॉक्टर जेनरिक दवाओं को न लिखकर ब्रॉन्डेड दवाओं को पर्चे पर लिखते हैं। जो कि काफी महंगी होती है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि अगर किसी को बुखार है, तो डॉक्टर पैरासीटामाल (फॉर्म्युला) लिख सकता है। लेकिन वह ब्रांडेड दवा जैसे क्रोसीन , कैलपाल का नाम लिखता है। जो कि जेनरिक दवाओं की तुलना में महंगी होती हैं।
 
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