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मनी भास्कर खास / लोन के गारंटर के लिए सरकार ला रही है नया कानून, लोन की वसूली के लिए घर को नहीं किया जाएगा नीलाम

वर्तमान नियम में लोन वसूली के लिए घर तक की नीलामी

Government is bringing new law to those who become guarantors of loans
  • दिवालिया कानून का लाभ व्यक्तिगत रूप से भी, छोटे एवं मझोले उद्यमी भी आएंगे दायरे में

नई दिल्ली। होम लोन एवं ऑटो लोन या एजुकेशन लोन या किसी भी प्रकार के लोन के गारंटर के लिए अच्छी खबर है। सरकार इन गारंटर के लिए नया कानून लाने जा रही है। अब इस लोन को लेने वाले के डिफॉल्टर घोषित होने पर गारंटर को बैंक या पुलिस की तरफ से तंग नहीं किया जाएगा। इन्हें इज्जत के साथ बाहर निकलने का रास्ता मुहैया कराया जाएगा। आर्थिक मामलों मंत्रालय गारंटर को लेकर नया कानून लाने जा रही है। इस मामले में कुछ माह पहले कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने अपनी सिफारिश मंत्रालय को सौंप दी है। अब नई सरकार के गठन पर इस सिफारिश को नोटिफाई किया जा सकता है।

इस कमेटी के सदस्य एवं फेडरेशन ऑफ स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज के महासचिव अनिल भारद्वाज ने मनी भास्कर को बताया कि मान लीजिए कोई व्यक्ति बेटे के एजेकुशेन लोन के लिए गारंटर बना। बाद में उसका बेटा लोन नहीं चुका पाया। ऐसे में, गारंटर को राहत यह मिलने जा रही है कि पैसे की वसूली के लिए उसके उस घर को नहीं बेचा जाएगा जिसमें वह रह रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है कि वह 10 कमरों के मकान में रह रहा है तो उसे नहीं बेचा जाएगा। उसे इज्जत के साथ रहने के लिए छत मुहैया करा दी जाएगी। अभी  के नियम के मुताबिक पैसे की वसूली के लिए गारंटर के घर तक को नीलाम कर दिया जाता है।  लेकिन प्रस्तावित कानून में राहत की बात यही है कि गारंटर के सिर पर छत को रहने दिया जाएगा। 

दिवालिया कानून का लाभ व्यक्तिगत रूप से भी, छोटे एवं मझोले उद्यमी भी आएंगे दायरे में

आर्थिक मामलों के मंत्रालय की तरफ से व्यक्तिगत रूप किसी को  दिवालिया घोषित करने का मौका देने के नियम बनाने पर विचार किय जा रहा है। वहीं, इसका लाभ छोटे उद्यमियों (एमएसएमई) को मिलेगा। अभी दिवालिया कानून सिर्फ कंपनी के लिए है। जल्द ही इस मामले में कमेटी का गठन किया जा सकता है। वर्ष 2016 में इनसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड लागू किया गया, लेकिन यह सिर्फ कंपनी पर लागू होता है। प्रोप्राइटरशिप या पार्टनरशिप या इंडिव्जूअल के लिए नियम लागू नहीं होता है। क्योंकि प्रोप्राइटरशिप में अधिकतर मामलों में अकेला व्यक्ति मालिक होता है। इस बदलाव से छोटे उद्यमियों को भी खुद को दिवालिया घोषित करने में मदद मिलेगी। 

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