बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policyइलेक्‍शन नहीं देश हित में हो रहे फैसले, रोजगार को लेकर हो रहीं बातें सही नहीं : नीति आयोग

इलेक्‍शन नहीं देश हित में हो रहे फैसले, रोजगार को लेकर हो रहीं बातें सही नहीं : नीति आयोग

नीति‍ आयोग के उपाध्यक्ष ने आज कहा कि जीएसटी, दिवालियापन संहिता सहित अन्‍य सुधारों को एकजुट करने का समय आ गया है।

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नई दि‍ल्‍ली. नीति‍ आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रविवार को कहा कि जीएसटी, दिवालियापन संहिता और बेनामी कानून सहित अन्‍य सुधारों को एकजुट करने का समय आ गया है। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मोदी सरकार ने पिछले 42 महीनों में कदम उठाए हैं, जो वो बि‍लकुल सही हैं। वहीं, उन्‍होंने कहा कि‍ अगले 18 महीनों में सरकार को नई पहल करते हुए स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्‍योंकि‍ यह दोनों विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले अपने अंतिम नियमित बजट को फरवरी में पेश करेगी, तो उन्‍होंने कहा कि‍ सरकार जो कर रही है वह देश के लिए सही है, न कि चुनावों की नजर से। उन्‍होंने कहा कि रोजगार के अवसरों की कमी को लेकर बढ़ा चढ़ा कर बातें की जा रही हैं, जो सच नहीं हैं।


42 महीनों में क्‍या कि‍या ये बताने का समय आ गया है

एक इंटरव्‍यू में राजीव कुमार ने कहा कि‍ आप जानते हैं मोदी सरकार ने 42 महीनों में बहुत कुछ किया है। सरकार ने बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ऐसे में मेरा मानना है कि‍ अब समय आ गया है जब यह सुनिश्चित कि‍या जाए कि‍ इन कदमों से क्‍या सुधार हुए हैं और इससे देश को क्‍या फायदा हुआ है।

 

बड़े बदलाव हैं GST, आईबीसी और DBT  

नीति‍ आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि‍ नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार मई 2014 में सत्ता में आई और अगले आम चुनाव 2019 में होने हैं। लेकि‍न इस बीच जीएसटी, बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) जैसे सुधार के उपाय और डायरेक्‍ट बेनि‍फि‍ट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी प्रमुख योजनाएं सरकार की बहुत बड़ी पहल हैं।

 

रोजगार में कमी को बढ़ा चढ़ा कर पेश कि‍या

"उन्‍होंने कहा कि‍ अब हमें सामाजिक क्षेत्र को छोड़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली पर ध्‍यान देना चाहि‍ए। वहीं, रोजगार नहीं पैदा कर पाने पर हो रही है सरकार की आलोचना पर उन्‍होंने कहा कि‍ रोजगार के अवसरों में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि यह संगठित और औपचारिक क्षेत्र में नहीं हो सके हैं। "ईपीएफओ के खातों की संख्या बढ़ गई है, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) खातों की संख्या में वृद्धि हुई है वहीं, सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या में तो विशेष रूप से बढ़ोतरी है, खासकर पर्यटन, नागरिक उड्डयन, परिवहन और सेवा क्षेत्र में। ऐसे में मुझे लगता है कि‍ रोजगार की कमी को बढ़ा चढ़ा कर पेश कि‍या गया है।




 

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