मनी भास्कर खास /स्मार्ट सिटी से पीछे हटी सरकार, अब शहरों के विस्तार के लिए नई नीति

  • शहरी विस्तार के अनुसार हर दो साल में मास्टर प्लान का रिव्यू करने का प्रावधान
  • किसानों को जमीन के बदले अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देने की कोशिश 

money bhaskar

May 22,2019 05:44:01 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली

चार साल पहले बड़े ही जोर शोर से शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन पर सरकार पीछे हट गई है। अब सरकार की कोशिश है कि देश में शहरों के विस्तार के लिए नई नीति बनाकर विकास किया जाए। आवासन एवं शहरी मामले मंत्रालय (एमओएचयूए) ने नेशनल अर्बन पॉलिसी फ्रेमवर्क (एनयूपीएफ) का ड्राफ्ट तैयार किया है। मंत्रालय ने 31 मई तक इस पर सुझाव मांगे हैं। सुझावों को नई गठित होने वाली सरकार के समक्ष पेश किया जाएगा।

स्मार्ट सिटी मिशन शहर के एक हिस्से या पूरी तरह से खाली जमीन पर न्यू डेवलपमेंट तक सीमित था। 100 स्मार्ट सिटी में से किसी में भी 30 प्रतिशत से ज्यादा काम नहीं हुआ है। सरकार ने हर स्मार्ट सिटी के लिए 500 करोड़ रुपए रखे हैं। इसके बाद हर शहर की स्मार्ट सिटी कंपनी को ही बाकी की राशि जुटानी है। इसमें लंबा वक्त लगेगा और यह सीमित क्षेत्र में ही असरकारी होगी। इसलिए अब सरकार चाहती है कि स्मार्ट सिटी के अलावा पूरे शहर के समग्र विकास पर जोर दिया जाए। खासकर प्लानिंग पर। लिहाजा, नए मसौदे में शहरी विकास के नए पहलुओं को शामिल किया जाएगा। आबादी, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के हिसाब से शहर विस्तार का खाका तैयार होगा। इसमें शहर विकास के नए सिद्धांत ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी), ट्रांसफरेबल डेवलवमेंट राइट्स (टीडीआर), जोन प्लानिंग आदि को शामिल किया गया है।

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प्लानिंग को 10 हिस्सों में बांटा

व्यवस्थित बसाहट के हिसाब से शहर को विकसित करने के लिए 10 भागों में प्लानिंग को बांटा गया है। प्लानिंग पर अमल करने के लिए मांगे गए सुझावों के आधार पर सभी शहरों के लिए अर्बन प्लान यानी मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। जनसंख्या घनतत्व के आधार पर प्लानिंग पर जोर दिया गया है। इतना ही नहीं विदेशों में हुए अर्बन डेवलवमेंट के बेहतरीन उदाहरणों को भी पेश किया गया है।

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नई नीति का हम पर असर

शहर के वर्तमान स्वरूप पर नई नीति का सीधे असर नहीं होगा। पूरी नीति का जोर इस बात पर है कि जमीन की कमी को कैसे पूरा किया जाए। लिहाजा, सरकार मौजूदा इलाकों को तोड़कर नए सिरे से बसाने की रिस्क ले सकती है। हालांकि कोशिश होगी कि मौजूदा हिस्से में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देकर लोगों की आवास जरूरतों को पूरा किया जाए। ट्रैफिक से निपटने के लिए मेट्रो ट्रेन के अलावा नई तकनीक से ट्रैफिक कंट्रोल आदि का विकल्प दिया जाए। हालांकि शहर के बाहरी हिस्सों में ही नए रोजगार के अवसर पैदा कर लोगों को वहां शिफ्ट करने पर सरकार का खास फोकस है।

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आय पर ज्यादा फोकस

शहरों में विकास के लिए मोटी रकम चाहिए। लिहाजा ड्राफ्ट में शहरी अर्थव्यवस्था के लिए भी क्षेत्रों के अनुसार टैक्स इनक्रिजिंग फाइनेसिंग (टीआईएफ) पॉलिसी पर अमल करने का सुझाव भी दिया गया है। इसी तरह जमीन अधिग्रहण में खर्च होने वाली मोटी रकम का विकल्प टीडीआर के रूप में बताया गया है। मतलब जमीन के एवज में संबंधित जमीन मालिक को अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी जाए। जमीन मालिक अपनी इस अनुमति को बेचकर मुआवजे की भरपाई भी कर सकता है। यही नहीं, जमीन मालिक शहर के जिस हिस्से में यह अनुमति भेजेगा, वहां भी मौजूदा इमारतों की ऊंचाई बढ़ाकर ज्यादा लोगों की बसाहट संभव हो सकेगी।

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इन बिंदुओं पर होगा शहरी विकास

  • शहरी नियोजन
  • शहरी अर्थव्यवस्था
  • इन्फ्रास्ट्रेक्चर (सामाजिक व भौतिक विकास के लिए)
  • हाउसिंग
  • शहरी परिवहन
  • बजटिंग व कराधान
  • शहर सरकार
  • शहरीकरण व सूचना तंत्र
  • पर्यावरण के लिए प्लानिंग

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शहरों का कलस्टर बनाकर विकास की बात

एनयूपीएफ में बताया गया है कि दो या दो से अधिक आपस में सटे हुए शहरों के विकास के लिए प्लानिंग की आवश्यकता है। यानी कि शहरों का कलस्टर बनाकर बड़ी योजना का क्रियान्वयन किया जाए। जैसे कि पानी सप्लाई के लिए एक ही योजना से कई शहरों को जोड़ना। इसके लिए मास्टर प्लान के साथ रीजनल प्लान पर जोर दिया गया है। अर्बन एक्सपर्ट मनोज सिंह मीक बताते हैं कि अब तक मास्टर प्लान को लेकर तो काम हुआ लेकिन शहरों के समूहों को लेकर रीजनल प्लान पर कवायद शुरू नहीं की गई।

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हर दो साल में मास्टर प्लान का होगा रिव्यू

प्लानिंग में शहरी विकास के मद्देनजर महत्वपूर्ण प्रावधान की बात कही गई है। दरअसल, हर साल शहरों के मास्टर प्लान को वर्तमान स्थिति के हिसाब से नए प्रावधानों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। इसमें लैंडयूज और क्षेत्रानुसार दिए जाने वाले एफएआर में संसोधन की बात कही गई है। जीआईएस वेस्ड मास्टर प्लान में लोगों की सुविधाओं के लिहाज से विभिन्न लेयर को शामिल करना होगा। जिसमें गैस पाइपलाइन, बिजली की अंडरग्राउंड लाइन, कम्यूनिटी हाल, यूटिलिटी डक्ट, पानी की पाइप लाइन, अस्पताल, औद्योगिक क्षेत्र, शिक्षण संस्थान जैसे कई वर्गों के लिए लैंडयूज की स्थिति पता चल सकेगी।

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