राहत /बैकफुट पर सरकार, 2025 से बंद नहीं होगी पेट्रोल वाले दोपहिया वाहनों की बिक्री!

Moneybhaskar.com

Jun 18,2019 01:12:16 PM IST

नई दिल्ली। 2025 तक पेट्रोल के दोपहिया वाहनों की बिक्री को बंद करने की नीति पर सरकार बैकफुट पर आ गई है। इस पर हाल में ऑटो सेक्टर ने सवाल उठाए थे। केंद्र सरकार के थिंकटैंक नीति आयोग ने अब इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर नया रोडमैप जारी किया है। इस नए रोडमैप में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन बेचने की नीति को 2030 के बाद लागू करने की बात कही है।

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मंत्रालयों को भेजा कैबिनेट नोट

टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, नीति आयोग की ओर से स्वच्छ ईंधन तकनीक अपनाने को लेकर तैयार किए गए कैबिनेट को रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्ट्री समेत कई मंत्रालयों को भेजा गया है। इस नोट में सभी मंत्रालयों से 2030 तक पेट्रोल-डीजल वाहनों को बाहर करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा गया है। इस नोट में रोड ट्रांसपोर्ट मंत्रालय से कुछ नेशनल हाईवे पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ट्रकों और बसों के लिए ई-हाईवे तैयार करने को कहा गया है। आपको बता दें कि पहले नीति आयोग ने 2025 से 150 सीसी तक के केवल इलेक्ट्रिक टू व्हीलर बेचने की वकालत की थी।

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ऑटो सेक्टर के दबाव के बाद बैकफुट पर सरकार

सौ फीसदी इलेक्ट्रिक व्हीकल और 2025 से केवल इलेक्ट्रिक टू व्हीलर बेचने की योजना सामने आने के बाद ऑटो सेक्टर ने सरकार पर दबाव बनाने शुरू कर दिया था। इसके लिए ऑटो सेक्टर के प्रमुख कारोबारी राहुल बजाज और वेणु श्रीनिवासन ने लॉबिंग शुरू कर दी थी। ऑटो सेक्टर के बढ़ते दबाव के बीच नीति आयोग अब इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर नई नीति लेकर आया है। इस दबाव का ही नतीजा है कि अब रोड ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी इलेक्ट्रिक व्हीकल को लागू करने के लिए बनने वाले रोडमैप को ऑटो इंडस्ट्री की सलाह से तैयार करने की बात कह रहे हैं।

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सियाम भी जता चुका है चिंता

वाहन निर्माता कंपनियों का संगठन सियाम भी 2023 तक पेट्रोल-डीजल वाले तिपहिया वाहनों और 2025 तक पेट्रोल वाले दोपहिया वाहनों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध पर अपनी चिंता जता चुका है। सियाम के अध्यक्ष राजन बढ़ेरा का कहना है कि देश में इलेक्ट्रिक परिवहन को यथाशीघ्र लाने की नीति आयोग की महत्त्वाकांक्षी आकांक्षा का वाहन उद्योग पूरा समर्थन करता है। लेकिन, यह अनावश्यक रूप से वाहन उद्योग को नुकसान पहुंचाए बिना भी संभव है और इसलिए इस महत्त्वाकांक्षा को व्यावाहारिक स्तर पर लाने की जरूरत है। वढ़ेरा का कहना है कि आज वाहन उद्योग के समक्ष कई चुनौतियां हैं। उसे बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 को अपनाना है तथा कई नए सुरक्षा मानकों का पालन करना है और यह सब इतने कम समय करना है जिसकी दुनिया में कोई मिसाल नहीं है। इन सब के लिए उद्योग 70,000 से 80,000 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश कर रहा है। इस निवेश की वसूली से पहले ही सरकार पारंपरिक अंत:दहन इंजनों को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है। यह अव्यावहारिक तथा असामयिक है।

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