बदलाव /बदल सकते हैं जीडीपी मापने के मानक, वैश्विक निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने की सिफारिश

Money Bhaskar

May 10,2019 03:21:55 PM IST

नई दिल्ली। 8 और 9 मई को मुंबई में 15वें वित्त आयोग के साथ हुई बैठक में विश्व के कई शीर्ष निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के आधिकारिक आंकड़ों पर शक जताया है। इन निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना मापने के लिए अलग मापक अपनाने की सिफारिश की है।

केंद्र सरकार पर लगाया गलत डाटा पेश करने का आरोप

दुनियाभर में करीब 49 लाख करोड़ रुपयों का प्रबंधन करने वाली एबरदीन स्टैंडर्ड इन्वेस्टमेंट फर्म के मुख्य अर्थशास्त्री जेरेमी लॉसन ने केंद्र सरकार पर गलत डाटा पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदीकी वजह से कारोबार और रोजगार पर बुरा असर पड़ा था। इसके बाद भी केंद्र सरकार ने 2016-17 की जीडीपी के आंकड़ों को संशोधित कर पहले के 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 8.2 फीसदी कर दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि वह भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े डाटा एकत्र करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करेंगे।

कॉरपोरेट मंत्रालय का डेटाबेस विश्वसनीय : अधिकारी

डाटा पर सवाल उठने के बाद कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा कि मंत्रालय एक काफी विश्वसनीय डेटाबेस या आंकड़े रखता है और इसमें कोई ब्लैक बॉक्स नहीं है। श्रीनिवास ने कहा कि यह सांख्यिकी अधिकारियों को तय करना होता है कि कौन से आंकड़े सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिए हैं। श्रीनिवास ने कहा कि मंत्रालय का एमसीए-21 पोर्टल एक भरोसा आधारित प्रणाली है। यहां आने वाली सूचनाएं कंपनियों द्वारा किए गए खुलासे पर आधारित होती हैं।

विरोधाभासी डेटा का मिलान करना चाहता है वित्त आयोग

वहीं डेटा की विश्वसनीयता को लेकर आपत्तियों के बीच 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा को एक साथ मिलाने तथा सर्वश्रेष्ठ निष्कर्ष पर पहुंचने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका डेटा गणन की उन पद्धतियों से कुछ भी लेना-देना नहीं है जिसे लेकर सवाल उठ रहे थे। सिंह ने कहा कि हम सबको एक साथ मिलाने तथा सर्वश्रेष्ठ निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश करेंगे कि हम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध किन डेटा को विश्वसनीय मान सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह काम कैग और रिजर्व बैंक के साथ मिलकर किया जाएगा।

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