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फैसला / पजेशन के लिए घर खरीदार अनंतकाल तक नहीं कर सकते हैं इंतजार, बिल्डर तत्काल लौटाए रकम

रेरा में दी गई जानकारी को आयोग ने नहीं माना, बिल्डर को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल रकम लौटाने का आदेश

For the house buyer can not wait for eternity, the builder immediately returns the amount

नई दिल्ली. रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों की मनमानी से परेशान लोगों के लिए यह राहत की खबर है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने बिल्डर की कड़ी खिंचाई करते हुए कहा है कि खरीदारों को पजेशन के लिए अनिश्चितकाल का इंतजार नहीं करा सकते हैं। यही नहीं, आयोग ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी में बिल्डर के प्रोजेक्ट कंप्लीशन की मियाद को भी मानने से इंकार कर दिया। आयोग ने बिल्डर को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ मूल राशि लौटाने के आदेश दिए। 

 

सात साल से खरीदार कर रहा है पजेशन का इंतजार 

 

गुरुग्राम में ओरिस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अपार्टमेंट में फ्लैट के लिए अशोक कुमार तनेजा ने मई 2012 से दिसंबर 2016 तक 1.15 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। डेवलपर ने 2016 तक पजेशन का वादा किया था। लेकिन बाद में कंपनी मुकर गई। इस पर शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में केस दायर किया। 

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कानून की इस कमजोरी का फायदा उठाया 

 

रेरा एक्ट आने के बाद हर राज्य में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन हुआ। इसमें यह प्रावधान रखा गया कि ऑनगोइंग प्रोजेक्ट का भी रजिस्ट्रेशन कराया जाए। बिल्डर ने रजिस्ट्रेशन करवा कर पजेशन की तारीख 2020 बता दी। रेरा कानून के तहत बिल्डर को यह छूट मिल गई कि वह वर्ष 2020 तक पजेशन दे। जबकि शिकायतकर्ता को बिल्डर ने वर्ष 2016 में पजेशन का वादा किया था। इसी वजह से शिकायतकर्ता की कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। 

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यह कहा फैसले में 

 

आयोग ने कहा कि बिल्डर ने सेवा में कमी की है और व्यापार में अनुचित व्यवहार किया है। बिल्डर और शिकायतकर्ता के बीच हुआ अनुबंध देखा जाना जरूरी है। आयोग की बेंच के अध्यक्ष आरके अग्रवाल और सदस्य एम श्रीशा ने कहा कि फ्लैट खरीदारों द्वारा भुगतान में किसी भी देरी के लिए डेवलपर पर 18 प्रतिशत की दर से ब्याज लगाया जाता है, लेकिन उसी समय यदि बिल्डर परियोजना अधूरी छोड़ देता है तो वापसी केवल नौ प्रतिशत के ब्याज पर की  जाती है। यह अनुचित है। बेंच ने शिकायतकर्ता को 12 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ 1.15 करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया। डेवलपर को तनेजा को 25,000 रुपये की मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
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