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मेरा बैंक-बड़ा बैंक /2017 में 27 सरकारी बैंक थे अब 12 रह गए : वित्त मंत्री

  • पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक और युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का होगा विलय
  • केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक होंगे एक
  • यूनियन बैंक में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का विलय
  • इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय
  • बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक का किसी के साथ मर्जर नहीं
  • बैंक बोर्ड तय करेगा मर्जर की तारीख

Moneybhaskar.com

Aug 30,2019 07:18:49 PM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2017 में देश में 27 सरकारी बैंक थे, अब सिर्फ 12 सरकारी बैंंक रह गए। उन्होंने देश को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शुक्रवार को सरकारी बैंकों के विलय और गवर्नेंस सुधार की अहम घोषणा की। वित्त मंत्री की घोषणा के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक और युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय होगा। केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक एक हो जाएंगे। युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में आंध्रा बैंक और काॅरपोरेशन बैंक का विलय होगा। इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक को मर्ज कर दिया जाएगा। बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक पहले की तरह स्वतंत्र तरीके से काम करते रहेंगे। सीतारमण ने कहा कि ये विलय पूरा हो जाने के बाद देश में सिर्फ 12 सरकारी बैंक रह जाएंगे। सीतारमण ने कहा कि देश को 2024 तक पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मजबूत बैंक जरूरी हैं।

पीएनबी बनेगा विलय के बाद दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक

पीएनबी में ओरिएंटल बैंक और युनाइटेड बैंक का विलय करने के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक हो जाएगा। इसका कुल कारोबार 17.95 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा। जो पीएनबी के मौजूदा कारोबार का करीब डेढ़ गुना होगा। 11,437 शाखाओं के साथ ब्रांच नेटवर्क के मामले में भी यह दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक हो जाएगा। इसके कर्मचारियों की संख्या 1,00,649 हो जाएगी।

केनरा बैंक बनेगा चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक

केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का विलय हो जाएगा। 15.20 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ यह देश का चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा।10,342 शाखाओं के साथ ब्रांच नेटवर्क के मामले में यह तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। विलय के बाद इसके पास 89,885 कर्मचारी होंगे।

यूनियन बैंक बनेगा कारोबार के मामले में पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक

यूनियन बैंक में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का विलय हो जाएगा। 14.59 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ यह पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक हो जाएगा। 9,609 शाखाओं के साथ इसके पास चौथ सबसे बड़ा ब्रांच नेटवर्क होगा। इसके पास 75,384 कर्मचारी होंगे।

इंडियन बैंक बनेगा सातवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक

इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय हो जाएगा। 8.08 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ यह सातवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक हो जाएगा। इसके पास 42,814 कर्मचारी होंगे।

बदल जाएगी सरकारी बैंकिंग क्षेत्र की तस्वीर

विलय पूरा होने के बाद देश के सरकारी बैंकिंग क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी। देश में 12 सरकारी बैंक बचे रहेंगे। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में अन्य सहयोगी बैंकों का पहले ही विलय हो चुका है। 52.05 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ यह देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक है। इसी तरह से बैंक ऑफ बड़ौदा में इसी साल विजया बैंक और देना बैंक का विलय हो चुका है। 16.13 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ यह तीसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा। अभी यह एसबीआई के बाद दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक है। विलय होने के बाद देश में बड़े आकार के छह सरकारी बैंक बचेंगे। इसके साथ ही 9.03 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ बैंक ऑफ इंडिया और 4.68 लाख करोड़ रुपए के कारोबार के साथ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का अलग अस्तित्व कायम रहेगा और इसकी देशव्यापी मौजूदगी बनी रहेगी। इसके साथ क्षेत्रीय कारोबार वाले चार बैंक भी अस्तित्व में रहेंगे। इनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं।

गवर्नेंस में भी होंगे अहम सुधार

सीतारमण ने बैंकों को सक्षम और बेहतर बनाने के लिए कई अहम सुधारों की भी घोषणा की।

चीफ रिस्क ऑफीसर की नियुक्ति : सरकारी बैंकों में चीफ रिस्क ऑफीसर की नियुक्ति बाजार से होगी। बेहतर प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए उन्हें बाजार में मिल रहे वेतन के मुताबिक वेतन दिया जाएगा।

टॉप लेवल पर दो साल से कम के लिए नहीं होगी नियुक्ति : बैंकों में जनरल मैनेजर और उससे ऊपर के पदों पर उन्हीं अधिकारियों की नियुक्ति होगी, जिनके पास सेवानिवृत्त होने से पहले कम से कम दो साल का समय बचा होगा। इससे यह तय होगा कि इन पदों पर जिनकी भी नियुक्ति होगी, वे कम से कम दो साल के लिए काम कर पाएंगे।

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