योजना /फसल अवशेषों के खेत में प्रबंधन के लिए कृषि तकनीकी करण का प्रोत्साहन

  • भारत सरकार ने लगभग 1150 करोड़ की ‘फसल अवशेषों के खेत में प्रबंधन के लिए कृषि तकनीकी करण का प्रोत्साहन‘ योजना बनाई

Moneybhaskar.com

Aug 13,2019 05:23:00 PM IST

नई दिल्ली. भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में धान के फसल अवशेषों को मुख्यत जलाया जाता है। हरित क्रान्ति के मुख्य गलियारों में फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न होने वाले जनस्वास्थ्य के खतरों एवं कृषि कल्याण व स्थिरता के विभिन्न मुद्दों को देखते हुये, भारत के प्रधानमंत्री ने एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया था। इस टास्क फोर्स के गठन का उद्देश्य उत्तर-पश्चिमी भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फसल अवशेषों का यथा स्थान प्रबंधन हेतु उपयुक्त सुझाव एवं मार्गदर्शन देना था।

भारत सरकार ने लगभग 1150 करोड़ की कृषि तकनीकी करण का प्रोत्साहन योजना बनाई

टास्क फोर्स के सुझाव से 2018 के दौरान, भारत सरकार ने लगभग 1150 करोड़ की ‘फसल अवशेषों के खेत में प्रबंधन के लिए कृषि तकनीकी करण का प्रोत्साहन‘ योजना बनाई, जिसमें लगभग 100 संस्थानों जिसमें कृषि विज्ञान केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थान, राज्य कृषि संस्थाएं, कृषि विश्वविद्यालय आदि को सम्मिलित करके किसानों के हित हेतु कृषि मशीनरी उपलब्धता के साथ-साथ उनके मध्य ज्ञान सांझा करना, जागरूकता अभियान चलाना एवं क्षमता विकास के विभिन्न आयाम सुनियोजित करना था।

विकास प्रभागों एवं गैर-सरकारी संस्थाएं के साथ प्रगाढ़ संबंध स्थापित करना है

इन संस्थानों का किसानों एवं निजी क्षेत्र (मशीन निर्माण एवं विभिन्न कृषि सेवाएं प्रदत्त) के विकास प्रभागों व अन्य राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों जैसे अन्तर्राष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं अनुसंधान केन्द्र एवं गैर-सरकारी संस्थाएं (एनजीओ) के साथ प्रगाढ़ संबंध स्थापित करना है। ये सभी सम्मिलित रूप से फसल अवशेषों के यथा स्थान प्रबंधन की तकनीकियों को विकसित करने व किसानों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे है। इसके तहत विभिन्न जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनी के द्वारा किसानों से सम्पर्क किया जाता है। भारत के प्रबुद्ध राजनैतिक नेतृत्व, उच्च प्रशिक्षित वैज्ञानिकों एवं जागरूक किसानों के सांझा प्रयासों से ही भारत विभिन्न क्रांतियों (हरित, नीली, सफेद इत्यादि) वाले देश के रूप में जाना जाता है। इन सब के सांझा प्रयासों से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन हेतु फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन हेतु ‘सर्वथा हरित क्रान्ति‘ की नींव रखी जा चुकी है, जो कि बाकी दुनिया के लिये एक उदाहरण साबित हो रही है।

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