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कवायद / पेंशन का पैसा डूबने से बचाने के लिए ईपीएफओ सतर्क, नॉन बैंकिंग कंपनियों से निवेश वापसी की कोशिश

एनबीएफसी से फंड वापस लेने पर कर्मचारियों की पेंशन पर भी पड़ेगा फर्क, कम हो सकती है पेंशन राशि

EPFO cautious to save pension money from drowning, seeks investment withdrawal from non-banking companies
  • एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति नाजुक, सीबीटी की बैठक में होगा अंतिम फैसला

नई दिल्ली. निजी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों समेत विभिन्न कारखानों और संस्थानों में कार्यरत  कर्मचारियों की पेंशन और बचत राशि का संचालन करने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) एक बड़ा फैसला ले सकता है। ईपीएफओ नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) में किया गया निवेश वापस ले सकता है। इसकी वजह है आईएल एंड एफएस और इसकी जैसी अन्य कंपनियों में निवेश राशि का डूबना या रिस्क पर होना। सूत्र बताते हैं कि ईपीएफओ डीएचएफएल में किया गया अपना निवेश वापस करने के विकल्प पर काम कर रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ईपीएफओ की सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ (CBT) लेगा। सरकार गठन के बाद नए मंत्री की अध्यक्षता वाली यह समिति ही तय करेगी कि एनबीएफसी से कैसे पैसा वापस लिया जाए?

 

कर्मचारियों की पेंशन पर पड़ेगा फर्क

 

ईपीएफओ कर्मचारियों और नियोक्ता से जो अंशदान लेती हैं उसका एक हिस्सा पेंशन व दूसरा हिस्सा बचत के रूप में जमा होता है। ईपीएफओ पेंशन राशि को एनबीएफसी समेत अन्य पेंशन फंडों में लगाती है। एनबीएफसी से ईपीएफओ को ज्यादा ब्याज दर मिलती है। यदि निवेश वापस लिया गया तो ब्याज दर भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर अंत में कर्मचारियों की पेंशन पर भी पड़ सकता है। 

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एनबीएफसी में यह दिक्कत 

 

नोटबंदी के बाद एनबीएफसी कंपनियों ने अच्छा रिटर्न दिया है। लेकिन अब यह धारणा टूट रही है। इनमें किया गया निवेश जोखिम भरा हो गया है। इस महीने की शुरुआत में ईपीएफओ की वित्त, निवेश और लेखा परीक्षा समिति (एफआईएसी) ने इस मुद्दे पर चर्चा की। NBFC द्वारा नया पब्लिक डिपॉजिट लेने और मौजूदा डिपॉजिट के रिन्युअल से इनकार किए जाने के बाद दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DHFL) के शेयर को बुधवार को तगड़ा झटका लगा।  शुरुआती कारोबार में उसका शेयर 18 फीसदी तक कमजोर हो गया। इसलिए चर्चा है कि सबसे पहले इसी कंपनी से ईपीएफओ अपना निवेश बाहर करेगा। 

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पहली प्राथमिकता कर्मचारियों के पैसों की सुरक्षा

 

एक सूत्र ने बताया कि ईपीएफओ कुछ एनबीएफसी के डाउनग्रेड की निगरानी कर रहा है। किसी भी डिफ़ॉल्ट और धन की हानि से बचने के लिए निवेश की समीक्षा की जा रही है। ईपीएफओ की पहली प्राथमिकता श्रमिकों की सेवानिवृत्ति बचत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है ।

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आईएल एंड एफएस में यह नुकसान 

 

 ILF&FS में EPFO ​​द्वारा 574.73 करोड़ का निवेश किया गया। कंपनी के दीवालिया होने का प्रकरण चल रहा है। इससे ईपीएफओ का भी पैसा फंसा हुआ है।  31 मार्च, 2018 तक EPFO ​​का कुल ऋण कोष 9.78 लाख करोड़ था। 

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