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लोकसभा चुनाव 2019 / नई सरकार के सामने रोजगार और GDP में बढ़ोतरी होगी सबसे बड़ी चुनौती

जनवरी- मार्च 2019 तिमाही के आंकड़े 31 मई को जारी किए जाएंगे, GDP ग्रोथ के फिसलने की आशंका

Employment and GDP will be the biggest challenge for the new government
  • आने वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की फंडिंग है
  • 2017-18 में बेरोजगारी दर के आंकड़े 6.1 फीसदी थे

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 में मतों की गिनती आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गई। 542 सीटों पर आठ हजार से ज्यादा  प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। शाम तक इस बात के संकेत  मिल जाएंगे कि किसकी सरकार बनने जा रही है। रुझानों में उम्मीद की जा रही है कि इस बार फिर बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। देश में सरकार चाहे कोई भी पार्टी बनाए लेकिन उन्हें सत्ता में आने  के बाद की आर्थिक चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा जो कि कुछ इस तरह ये हैं। 

तेज करनी होगी GDP ग्रोथ- चुनाव जीतने वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक  विकास की है। वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी ग्रोथ के 7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। देखा जाए तो यह 2014 मोदी सरकार के बाद सबसे कम ग्रोथ है।  जबकि अक्टूबर-दिसंबर 2018 तिमाही में ग्रोथ 6.6 फीसदी के साथ 6 साल के निचले स्तर पर चली गई थी। जनवरी- मार्च 2019 तिमाही के आंकड़े 31 मई को जारी किए जाएंगे जिसमें जीडीपी ग्रोथ के और फिसलने की आशंका जताई जा रही है। 

रोजगार की चुनौती- आने वाली सरकार के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती रोजगार बढ़ाने की होगी।  देश  में हर महीने 10 लाख से ज्यादा लोग वर्कफोर्स  में जुड़ते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लोगों को रोजगार नहीं मिलता। बेरोजगारी दर के आंकड़ों को लेकर नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन की कुछ महीने पहले लीक हुई रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में यह 6.1 फीसदी थी, जो 45 साल में सबसे ज्यादा है। यूपीए 2 के दौरान 2011-12 में यह 2.2 फीसदी थी। 

इंफ्रा प्रोजेक्ट की फंड़िंग- आने वाली सरकार के सामने तीसरी सबसे बड़ी चुनौती इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की फंडिंग है।  इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर मोदी सरकार ने काफी जोर दिया था। केयर रेटिंग की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अभी देश में कुल 1,424 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से 384 प्रोजेक्ट्स देरी से चल रहे हैं। इनकी कुल लागत 12.4 लाख करोड़ रुपए है। नई सरकार के लिए इनकी फंडिंग मुश्किल हो सकती है। बैंक लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज नहीं देना चाहते। वित्त वर्ष 2017-18 में बैंकों का कुल बैड लोन 10.4 लाख करोड़ था। सरकार के लिए अपनी जेब से इनकी फंडिंग भी आसान नहीं होगी। 

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