निर्देश /नियोक्ता की गलती नहीं भुगतेंगे कर्मचारी, डब्ल्यूआईपी प्रमाणपत्र दे ईएसआईसी : दिल्ली हाईकोर्ट 

  • न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने यह आदेश देते हुए कहा कि ईएसआईसी किसी और को दोषी नहीं ठहरा सकता

Moneybhaskar.com

Jul 23,2019 03:54:00 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने शिवानी बनाम ईएसआईसी मामले में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की बेटी आशी को "बीमित व्यक्ति की बेटी" का प्रमाणपत्र जारी करें ताकि वह ऐसे संस्थान में अकादमिक सत्र 2019-20 में एमबीबीएस में प्रवेश ले सके जो ईएसआईसी से अंगीभूत है। इस मामले की सुनवाई के लंबित रहने के दौरान आशी 2018-19 सत्र में प्रवेश नहीं ले पाई थी और उसका एक सत्र बेकार चला गया था।

किसी और को दोषी नहीं ठहरा सकता

न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने यह आदेश देते हुए कहा कि ईएसआईसी किसी और को दोषी नहीं ठहरा सकता। अगर नियोक्ता रिटर्न भरने में देरी करता है तो ऐसे नियोक्ता से निपटने के लिए पूरी प्रक्रिया मौजूद है। नियोक्ता ने रिटर्न दाख़िल नहीं किया इसकी सज़ा कर्मचारी को नहीं दी जा सकती और निगम के लिए ऐसा करना उचित नहीं है। "अगर कोई नियोक्ता विनियमन 31 के तहत निर्दिष्ट अवधि में अपना हिस्सा देने से चूक जाता है, तो निगम उससे ब्याज वसूलने के अलावा, 31-C के तहत हर्जाने भी वसूल सकता है। निगम के निरीक्षक के पास व्यापक दीवानी और पुलिस अधिकार है जिसका प्रयोग वह इस तरह के नियोक्ताओं के खिलाफ कर सकता है…अगर निगम निगरानी के काम में विफल रहता है तो इसकी ज़िम्मेदारी कर्मचारी के कंधे पर लादकर वह बच नहीं सकता।" पृष्ठभूमि ईएसआईसी ने याचिकाकर्ता (जो कि ईएसआईसी अधिनियम की धारा 2 के उपबंध 14 के तहत बीमित है) और उसकी दो बेटियों को "ई-पहचान" कार्ड जारी किया था।

याचिकाकर्ता की बेटी ने 12वीं की परीक्षा पास की और एमबीबीएस में प्रवेश के लिए उसने NEET 2018 की परीक्षा (UG-NEET) दी जिसमें वह पास हो गई। यह प्रावधान है कि इस परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र ईएसआईसी से संबद्ध मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में भी प्रवेश ले सकते हैं। याचिकाकर्ता ने 26 मई 2018 को ईएसआईसी में डब्ल्यूआईपी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन दिया। 6 जून 2018 को दुबारा आवेदन दिया गया और इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर उसने 8 जून 2018 को आरटीआई अधिनियम के तहत आवेदन दिया। 12 जून 2018 को ईएसआईसी ने इसका जवाब दिया कि नियोक्ता ने अपनी हिस्सेदारी जमा नहीं कराई है इसलिए डब्ल्यूआईपी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता।

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