खंडन /जीडीपी पर सुब्रमण्यन के दावों को पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद ने किया खारिज 

  • EAC-PM ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के 2011 के बाद जीडीपी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के दावों को खारिज कर दिया

Moneybhaskar.com

Jun 19,2019 08:00:00 PM IST


नई दिल्ली.
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन (Arvind Subramanian) के 2011 के बाद जीडीपी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के दावों को खारिज कर दिया। ईएसी-पीएम ने कहा कि उनके विश्लेषण में सेवाओं और कृषि से जुड़े आंकड़ों की अनदेखी की गई है और एक निजी कंपनी सीएमआईई पर आंखें बंद करके भरोसा कर लिया गया।

जीडीपी की मेथडोलॉजी को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप

ईएसी-पीएम द्वारा जारी पेपर में कहा गया कि भारत एक बड़ी और जिम्मेदार अर्थव्यवस्था है और उसके जीडीपी आकलन की मेथडोलॉजी को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप है। पेपर में मुख्य रूप से बिबेक देबरॉय, रतिन रॉय, सुरजीत भल्ला, चरण सिंह, अरविंद विरमानी जैसे अर्थशास्त्रियों ने योगदान किया है।

सुब्रमण्यन का दावा-बढ़ा चढ़ाकर पेश किए गए ग्रोथ के आंकड़े

पिछले सप्ताह एडवाइजरी बॉडी ने कहा था कि सुब्रमण्यन के रिसर्च पेपर का बिंदुवार खंडन जारी किया जाएगा। बीते साल सीईए पद से इस्तीफा देने वाले सुब्रमण्यन ने हाल में एक रिसर्च पेपर में कहा था कि 2011-12 और 2016-17 के बीच भारत की विकास दर को लगभग 2.5 फीसदी बढ़ाकर पेश किया गया था। ऐसा जीडीपी की गणना की तरीके में बदलाव के माध्यम से किया गया था।

आंकड़ों पर उठ रहे हैं सवाल

सुब्रमण्यन का हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पब्लिश पेपर तब सामने आया, जब आर्थिक विकास के आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं। सुब्रमण्यन अक्टूबर, 2014 से लगभग चार साल तक वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे।

सेवा और कृषि क्षेत्र की सुब्रमण्यन ने की अनदेखी

पेपर में कहा गया कि पूर्व सीईए सुब्रमण्यन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निष्कर्ष निकालने में कुछ जल्दबाजी की है। उन्होंने 17 हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स का इस्तेमाल किया, लेकिन विश्लेषण में सेवा क्षेत्र (जीडीपी में योगदान 60 फीसदी) और कृषि क्षेत्र (जीडीपी में 18 फीसदी) की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई।

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