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  • Dandiya Garba is also affected by the economic downturn, the organizers cut the budget

मनी भास्कर खास /डांडिया-गरबा पर भी आर्थिक मंदी का असर, आयोजकों ने की बजट में कटौती 

  • आयोजकों के मुताबिक, बुकिंग में भारी गिरावट हुई है
  • अभी तक सिर्फ 40-45 फीसदी बुकिंग ही हुई है

Varsha Pathak

Sep 16,2019 06:33:02 PM IST

नई दिल्ली. आर्थिक मंदी का असर भले ही ऑटो, एफएमसीजी जैसे सेक्टरों पर साफ नजर आ रहा हो लेकिन एंटरटेनमेंट सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है। नवरात्र में जहां हर साल लोग गरबा नृत्य और डांडिया रास के लिए हजारों रुपए खर्च कर देते थे वहीं इस साल वे बुकिंग कराने से भी कतरा रहे हैं। देशभर में बड़े पैमाने पर गरबा नृत्य और डांडिया रास का आयोजन किया जाता है। नवरात्र में खासकर गुजरात, मुंबई, दिल्ली, जैसे शहरों में गरबा और डांडिया का अलग उत्साह नजर आता है लेकिन इस बार यह उत्साह फीकी नजर आ रही है।

आर्थिक मंदी का असर

मनी भास्कर ने डांडिया के लिए मशहूर तीन शहरों में आयोजकों से बात की, जिसमें सामने आया कि मौजूदा आर्थिक मंदी असर डांडिया और गरबा आयोजन पर भी पड़ रहा है। आयोजकों ने अपने बजट में कटौती कर दी है। इस बार डांडिया व गरबा आयोजकों के मुताबिक, बुकिंग में भारी गिरावट हुई है। जानिए क्या कहना है आयोजकों का ;

आर्थिक मंदी और भारी बारिश बना मुसीबत -

गुजरात के अहमदाबाद शहर के आयोजक कंपनी सेलिब्रेशन के मेंबर सोनी पटेल ने कहा 'पिछले एक सालों में गुजरात में गरबा की रौनक कम हुई है। पिछले साल गुजरात सरकार के अवैध पार्किंग हटाने का सख्त आदेश के बाद प्लाॅट की कमी की वजह से गरबा की रौनक कम हो गई थी लेकिन इस बार पिछले साल के मुकाबले हालात और खराब ही हो गए है। एक तो राज्य सरकार का आदेश, ऊपर से भारी बारिश की वजह से कई लोगों ने टिकट बुकिंग ही नहीं की है। नहीं तो इस समय तक लगभग सारे टिकट बुक हो जाते थे।' सोनी ने कहा कि इस बार गरबा पर आर्थिक मंदी का प्रभाव भी है। कई आयोजकों के पास काम ही नहीं है तो कुछ नुकसान उठाकर काम कर रहे हैं।'

आयोजक कर रहे हैं बजट में कटौती -

दिल्ली के नीलम चौहान म्यूजिकल ग्रुप के आजाद सिंह ने बताया 'इस बार गरबा और डांडिया का काम बहुत कम है। हर साल जहां नवरात्र के 10-12 दिन पहले हमारे पास टिकट की बुकिंग फूल हो जाया करती थी वहीं इस बार अभी तक सिर्फ 40-45 फीसदी बुकिंग ही हुई है। जहां हम 40 हजार से लेकर 2 लाख तक के बजट में कार्यक्रम का आयोजन करते थे वहीं इस बार आधे बजट में कार्यक्रम आयोजन करना पड़ेगा। अधिकतर आयोजक बजट में कटौती कर रहे हैं।' उन्होंने इसका मुख्य कारण मार्केट में मनी का फ्लो कम होना बताया।

आर्टिस्ट को कम पैसे पर करना पड़ा रहा है काम -

येलो अम्ब्रेला सर्विस प्राइवेट लि., मुंबई के अश्विनी ने बातचीत में बताया, 'पहले नवरात्र में आर्टिस्ट की डिमांड इतनी बढ़ जाती थी अगर कोई आर्टिस्ट 5 हजार की जगह 20 हजार की डिमांड रखते थे तो आयोजक उन्हें मुंहमांगी रकम दे देते थे लेकिन इस बार हालात यह है कि आर्टिस्ट अपनी ऑरिजनल कीमत पर काम करने के लिए मजबूर है।'


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