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फैसला /40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनेगा, चीनी के लिए नया मूल्य भी जारी

  • चीनी सत्र 2019-20 के लिए गन्ने का एफआरपी 275 रुपए प्रति क्विंटल

Moneybhaskar.com

Jul 24,2019 05:30:46 PM IST

नई दिल्ली : सरकार ने घरेलू बाजार में पूंजी की स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के लिए 40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक (भंडारण) बनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यहां हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 1674 करोड़ रुपए की लागत से एक वर्ष के लिए 40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाया जाएगा। इसकी अवधि एक अगस्त 2019 से लेकर 31 जुलाई 2020 तक होगी। उन्होंने बताया कि खाद्य एवं जन वितरण विभाग चीनी के बाजार की स्थिति को देखते हुए समय समय पर इस बफर स्टॉक की समीक्षा करेगा और बाजार की स्थिति को देखते हुए इसमें बदलाव करेगा या इसे वापस ले सकेगा।

गन्ना किसानों को उनके बकाया की एवज में सीधे बैंक खातों में किया जाएगा

जावडेकर ने कहा कि बफर स्टॉक के लिए ली गयी चीनी का भुगतान चीनी मिलों के माध्यम से गन्ना किसानों को उनके बकाया की एवज में सीधे बैंक खातों में किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के इस फैसले से चीनी बाजार में पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी और चीनी मिलों के भंडारण में कमी आयेगी। चीनी बाजार में कीमतों में स्थिरता आएगी और किसानों को उनका बकाया मिल सकेगा।

चीनी सत्र 2019-20 के लिए गन्ने का एफआरपी 275 रुपए प्रति क्विंटल

सरकार ने चीनी सत्र 2019-20 के लिए गन्ना उत्पादक किसानों को उचित एवं लाभकारी (एफआरपी) मूल्य के तहत 10 प्रतिशत मूल रिकवरी वाले गन्ने का 275 रुपए प्रति क्विटंल दाम तय किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि 10 प्रतिशत की मूल रिकवरी के गन्ने की 275 रुपए प्रति क्विटंल कीमत निर्धारित की गयी है। दस प्रतिशत की मूल रिकवरी के बाद 0.1 प्रतिशत की अतिरिक्त रिकवरी के लिए किसानों को पौने तीन रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान चीनी मिलें किसानों को करेंगी। सरकार ने यह स्वीकृति कृषि लागत एवं मूल्य आयोग(सीएसीपी) की सिफारिश पर दी है। एफआरपी वह न्यूनतम कीमत है जिसके आधार पर चीनी मिलें गन्ना किसानों को उनकी फसल का भुगतान करती हैं। सरकार के इस मंजूरी से गन्ना उत्पादक किसानों को गारंटीड कीमत सुनिश्चित होती है। यह कीमत पूरे देश में लागू होती है।

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