• Home
  • Country moving towards lowest growth rate in six years

सुस्ती /छह साल में सबसे कम विकास दर की ओर बढ़ रहा देश

  • इंडिया रेटिंग्स ने 0.6 फीसदी घटाया देश का विकास अनुमान
  • चालू वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी रह सकती है देश की विकास दर
  • वित्त मंत्री की घोषणाएं सिर्फ कुछ समय के लिए ही विकास को दे सकती हैं सहारा

Moneybhaskar.com

Aug 28,2019 07:03:00 PM IST

मुंबई. घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश के जीडीपी विकास अनुमान को घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया। यह गत छह साल का निचला स्तर है। एजेंसी ने साथ ही कहा कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पिछले सप्ताह की गई घोषणाओं से सिर्फ कुछ समय के लिए ही विकास को सहारा मिल सकता है। रेटिंग एजेंसी ने पहले विकास दर 7.3 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी। एजेंसी ने कहा कि खपत मांग में कमी, मानसून में देरी और मैनयूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर में गिरावट के कारण देश की विकास दर कम रह सकती है। कुछ दिनों पहले विदेशी रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भी कैलेंडर वर्ष 2019 के लिए देश के विकास अनुमान को 6.8 फीसदी से घटाकर 6.2 फीसदी कर दिया था।

अंतरराष्ट्रीय ट्रेड वार का भी पड़ेगा असर

इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध के कारण देश का निर्यात प्रभावत होगा। इसके साथ ही समय पर कर्ज समाधान कर पाने के के मामले में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आईबीसी) की अक्षमता के कारण भी विकास दर के अनुमान में कटौती की गई है।

जून तिमाही की विकास दर 5.7 फीसदी रहने का अनुमान

रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष पहली तिमाही यानी जून तिमाही में विकास दर 5.7 फीसदी रह सकती है। यह विकास दर में लगातार पांचवीं तिमाही की गिरावट होगी। दूसरी छमाही में बेस इफेक्ट के कारण विकास दर बढ़कर 7.4 फीसदी पर पहुंच सकती है।

X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.