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सख्ती / कंपनी के निदेशकों को पास करनी होगी परीक्षा, कॉर्पोरेट फ्रॉड रोकने के लिए सरकार का प्लान

पहले कार्यकाल में कई फ्रॉड होने से अलर्ट है मोदी सरकार

Company independent directors will have to sit for exams on ethics and law
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार देश के कॉर्पोरेट गवर्नैंस सिस्टम को पूरी तरह बदलने पर विचार कर रही है

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार देश के कॉर्पोरेट गवर्नैंस सिस्टम को पूरी तरह बदलने पर विचार कर रही है, जिसके चलते उनके पहले कार्यकाल में कई फ्रॉड हुए थे। इस क्रम में अब कंपनी के बोर्ड्स में शामिल होने वाले स्वतंत्र निदेशकों को नियुक्ति से पहले एक परीक्षा पास करनी होगी।

बड़े एक्शन की तैयारी में सरकार

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी मामलों के मंत्रालय में टॉप ब्यूरोक्रेट इनजेति श्रीनिवास ने कहा कि नई व्यवस्था जल्द ही लागू हो जाएगी और इसके बाद स्वतंत्र निदेशकों को कंपनी बोर्ड्स में नियुक्ति से पहले एक परीक्षा से गुजरना होगा। वहीं सरकार देश के एक बड़े लेंडर में बढ़ते जोखिम के प्रति आगाह करने में नाकाम रहने पर डेलॉयट हैस्किंस एंड सेल्स पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। बैंकिंग रेग्युलेटर ने एक ऑडिट में समस्या देखने के बाद इस महीने ईवाई की सहयोगी कंपनी को सस्पेंड कर दिया था।

रेग्युलेटर्स की कौन करेगा निगरानी

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि भारत के वॉचडॉग्स यानी रेग्युलेटर्स की निगरानी कौन करेगा। बीते एक साल के दौरान भारत में कई स्कैम हुए हैं। ज्वैलर्स को लोन देने वाले एक सरकारी बैंक को 2 अरब डॉलर का झटका लगा है। वहीं एनबीएफसी (NBFC) सेक्टर में क्राइसिस आई और कई अरबपति दिवालिया हो गए। जानकारों ने कहा कि कंपनियों के कामकाज पर निगरानी रखने वाले स्वतंत्र निदेशकों को ये घोटाले होने से पहले इनका पता होना चाहिए।

परीक्षा की यह है वजह

श्रीनिवास ने कहा कि हम ये मिथक खत्म करना चाहते हैं कि स्वतंत्र निदेशकों की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि सरकार कॉरपोरेट लिटरेसी को बढ़ावा देना चाहती है, क्योंकि उन्हें अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेहियों के बारे में पता हो।
यह परीक्षा ऑनलाइन असेसमेंट के माध्यम से होगी। इसमें उनसे लॉ, एथिक्स और कैपिटल मार्केट सहित कुछ दूसरे मामलों के बारे में सवाल किए जाएंगे। स्वतंत्र निदेशक बनने के इच्छुक लोगों को यह परीक्षा पास करनी होगी। इसमें सहूलियत यह है कि वे तब तक परीक्षा दे सकते हैं जब तक पास ना हो जाएं।

अनुभवी निदेशकों को नहीं देनी होगी परीक्षा

अनुभवी निदेशक जो पहले से ही बोर्ड में हैं उन्हें परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि उन्हें अपना नाम सरकार के डाटाबेस में शामिल करना होगा। श्रीनिवास के मुताबिक, इससे यह पता चलेगा कि किस कंपनी को स्वतंत्र निदेशक की जरूरत है और कौन उस जगह को भर सकता है। मौजूदा कानून के मुताबिक, हर लिस्टेड कंपनी को अपने बोर्ड में एक तिहाई स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने होते हैं।
 

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