चिंताजनक /बांग्लादेश के जरिए चीन भारत में भेज रहा है कपड़ा, बढ़ रही है बेरोजगारी

money bhaskar

Jun 05,2019 07:17:00 PM IST

नई दिल्ली. देश में दूसरे सबसे बड़े रोजगार देने वाला कपड़ा सेक्टर मंदी का शिकार हो रहा है। श्रम व अन्य कानूनों में बदलाव के तीन साल बाद भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात साल 2018 में गिरकर 37.12 अरब डॉलर रह गया। यह वर्ष 2014 में यह 38.60 अरब डॉलर था। यही नहीं, इस दौरान आयात 5.85 अरब डॉलर से बढ़कर 7.31 अरब डॉलर हो गया है। इसकी वजह बांग्लादेश के जरिए चीन द्वारा भारत में कपड़ा भेजना और जीएसटी समेत अन्य कानून हैं। इससे वस्त्र उद्योग को खासा नुकसान पहुंचा है और इस सेक्टर में बेरोजगारी भी बढ़ी है। करीब एक करोड़ रुपए की नौकरी का लक्ष्य भी हासिल नहीं हो पाया है।

चीन का कपड़ा बांग्लादेश के जरिए पहुंच रहा भारत में



हालिया मंदी ने भी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है। इसके साथ ही भारत में जीएसटी और कराधान में भी बदलाव हुआ है। अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टेंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक कुछेक महीनों को छोड़कर अक्टूबर 2017 से परिधान निर्यात में लगातार गिरावट आ रही है। इसका मुख्य कारण कड़ी प्रतिस्पर्धा, कुछ खास निर्यात प्रोत्साहन का बंद होना और मंदी है। भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद आयात शुल्क में काफी गिरावट देखी गई है जिसने सस्ते आयात को प्रोत्साहित किया है। बांग्लादेश से आयात पर मूल सीमा शुल्क की पूरी छूट है और इसलिए चीन का कपड़ा आसानी से शुल्क मुक्त बांग्लादेश के जरिए भारत में आ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि लागत पर 6-7 प्रतिशत असर पड़ा है जिससे कपड़ा निर्माताओं के मुनाफे को भी चोट पहुंची।

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नहीं हुआ एक करोड़ नौकरियों का सृजन

जीएसटी व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाने के लिए उद्योग को लगे समय, निर्यात प्रोत्साहन में कमी और छोटे एवं मध्य स्तर के उद्यमों द्वारा ऋण की कमी से जूझने की वजह से उत्पादन में गिरावट आई। मंत्रालय और उद्योग निकायों के पास अपेक्षित आंकड़े न होने के बावजूद यह बात मानी जा रही है कि कपड़ा क्षेत्र के लिए 6,000 करोड़ रुपये का विशाल कार्यक्रम शुरू किए जाने के बावजूद वादा की गई एक करोड़ नौकरियों का सृजन नहीं हुआ है।

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बीते साल के मुकाबले चार प्रतिशत गिरावट



वित्त वर्ष 19 में अनुमानित 16.2 अरब डॉलर के लिहाज से भारत के परिधान निर्यात में वित्त वर्ष 18 की तुलना में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई है जो पिछले वर्ष की तुलना में चार प्रतिशत कम रहा। देश के कुल कपड़ा निर्यात में परिधान निर्यात की हिस्सेदारी भी वित्त वर्ष 2019 में 45 प्रतिशत रह गई जो वित्त वर्ष 2017 में 51 प्रतिशत थी। उद्योग के विशेषज्ञ इस गिरावट के लिए बांग्लादेश और वियतनाम जैसे कम लागत वाले प्रतिस्पर्धियों की ओर से अधिक खेपों को जिम्मेदार ठहराते हैं जिससे भारत के निर्यात बाजारों पर दबाव बढ़ा।

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