उम्मीद /नई सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं उद्योग जगत के पुरोधाओं को, जीडीपी ग्रोथ से लेकर रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग

  • इंडस्ट्री के बड़े बिजनेस पर्सन्स के मुताबिक यह बहुमत देश के लिए अच्छा होगा। 

Money Bhaskar

May 24,2019 04:07:11 PM IST

नई दिल्ली.

23 मई को आए नतीजों के बाद बाजार भी उछल पड़ा गया। शेयर बाजार ने रिकॉर्डतोड़ ऊंचाई को छुआ। लोगों को उम्मीद तो थी कि भाजपा ही सत्ता में लौटेगी, लेकिन इतनी बहुमत से लौटेगी ये किसी को अनुमान नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचंड जीत के बाद व्यापार जगत के दिग्गजों ने बताया कि उन्हें नई सरकार से क्या उम्मीदें हैं। इसमें जीडीपी ग्रोथ से लेकर रोजगार सृजन और बाजार में कैश फ्लो को बढ़ाने तक की उम्मीदें शामिल हैं।

केंद्र को देना चाहिए जीडीपी ग्रोथ पर ध्यान: आदि गोदरेज, चेयरमैन, गोदरेज समूह

‘मेरे हिसाब से यह बेहद अच्छा है कि एनडीए सत्ता में लौट आई है। इससे देश का आर्थिक विकास होगा जिसकी इस वक्त बेहद जरूरत है। इन नतीजों के बाद सरकार के पास जनादेश है कि वह एक्शन ले सके। अब तक सरकार चुनाव मोड में थी, अब सरकार काम पर लगेगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अच्छा है। सबसे आगे सरकार को जीडीपी ग्रोथ पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रोथ से नौकरियां पैदा होंगी, आय बढ़ेगी और खर्च करने की ताकत भी। इससे लोगों की सबसे बड़ी परेशानी दूर होगी, खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में और बाजार फिर से गुलजार हो सकेंगे। केंद्र को कॉरपोरेट टैक्स कम करने के बारे में सोचना चाहिए। सरकार ने पहले भी इसकी घोषणा की थी, लेकिन तब यह छोटी कंपनियों के लिए कम किया गया था, बड़ी कंपनियों के लिए नहीं।’

मैन्युफैक्चरिंग को बनाना होगा प्रतिस्पर्द्धात्मक: पवन गोयनका, सीईओ एंड एमडी, महिंद्रा एंड महिंद्रा

भाजपा के कट्‌टर समर्थकों ने जो सोचा था, नतीजे उससे भी ज्यादा निर्णायक रहे। यह देश के लिए अच्छी बात है क्योंकि इससे यह प्रमाणित होता है कि सरकार ने पिछले पांच सालों में जो काम किया वह सही दिशा में था। हम सभी ऐसी ही मजबूत सरकार चाहते थे, जिसे लोगों की तरफ से पूर्ण समर्थन मिले, जिससे सरकार कठोर फैसले ले सके। अगले पांच साल बेहतरीन हो सकते हैं, अगर सरकार, इंडस्ट्री और सिविल सोसाइटी मिलकर काम करे तो। नई सरकार का सबसे पहला काम होगा उपभोग को बढ़ाना, जो पिछले लंबे समय से रुका पड़ा है। सरकार को इस तरफ खर्च करना होगा। उम्मीद है सरकार बजट में इस पर ध्यान देगी। सरकार को मेक इन इंडिया को भी आगे लाना होगा। रोजगार सृजन भी सरकार की प्राथमिकता है, लिहाजा जो इंडस्ट्री जॉब जेनरेट करती है उसे सरकार की तरफ से प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

नीति-निमार्ण के लिए बहुत अच्छा शगुन है बहुमत: काकू नखाटे, प्रेसिडेंट एंड कंट्री हेड, बैंक ऑफ अमेरिका

चुनाव के नतीजे सरकार के समर्थन में आए हैं और ये सरकार के प्रदर्शन के प्रति आम वोटर की संतुष्टि दर्शाते हैं। एक स्पष्ट बहुमत नीति-निर्माण के लिए अच्छा संकेत होती है। मेरे खयाल से उधार की दरें कम करना, बैंक रिकैपिटलाजेशन और फोरेक्स रिजर्व को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता होगी। कैपिटल का कॉस्ट कम करने की प्रतिबद्धता के साथ सरकार अब बाजार में कैश फ्लो बढ़ाने पर फोकस करेगी। जमीन और मजदूरी रिफॉर्म और डिजिटाइजेशन भी ऐसे मुद्दे हैं, जिनपर सरकार का फोकस रहेगा। सकड़क निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, हाउसिंग और स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट नई सरकार के एजेंडों में सबसे आगे रहेंगे।

क्रेडिट-लिक्विडिटी टॉप एजेंडा होना चाहिए: वेत्री सुब्रमण्यम, ग्रुप प्रेसिडेंट एंड हेड (इक्विटी), यूटीआई म्युचुअल फंड

मार्केट और इकोनॉमी के लिए मोदी का लौटना एक अच्छा संकेत है। इस नतीजे से गठबंधन की सरकार बनने की संभावना भी खत्म हो गई है। चुनाव नतीजे आते ही इक्विटी मार्केट ऊपर उठ गए। इससे साफ होता है कि बाजार इस नतीजे से खुश है। लेकिन अब सरकार का फोकस राजनीति से हटकर इकोनॉमी और पॉलिसी पर आना चाहिए। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो भारतीय परिवारों की खर्च की उम्मीदों और बचत के बीच बैलेंस बिठा सके।

सरकार के दूसरे कार्यकाल में बदलनी चाहिए प्राथमिकताएं: हर्ष मारीवाला, चेयरमैन, मारिको ग्रुप

इस सरकार ने सभी उम्मीदों के आगे जाते हुए भारी बहुमत से जीत दर्ज कराई है। अब हमें एक मजबूत विपक्ष की दरकार है। मेरे हिसाब से विपक्षी दलों को आत्मचिंतन करना चाहिए। नई सरकार का फोकस अब जनकल्याण से हटकर सुधार पर जाना चाहिए। पिछले पांच साल में सरकार ने सुधार पर कम और जनकल्याण पर ज्यादा जोर दिया है। हालांकि सरकार ने जीएसटी, इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड जैसे कई अहम सुधार लागू किए। नोटबंदी को हम सुधार नहीं कह सकते, लेकिन यह कैश पर लोगों की निर्भरता खत्म करने के लिए जरूरी थी। लेकिन अब, सरकार का ध्यान जमीन, मजदूरी और कृषि सुधारों को लागू करने पर होना चाहिए। इन मुद्दों पर सरकार ने बहुत अधिक काम नहीं किया और अब सरकार को इन्हें अपनी प्राथमिकताओं की सूची में शामिल करना चाहिए।

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