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मनी भास्कर खास / एटीएम कारोबार में नुकसान होने से सैकड़ों एटीएम हो सकते हैं बंद, प्राइवेट प्लेयर नए एटीएम लगाने से कर रहे परहेज

एटीएम संबंधी नियम में सख्ती से एटीएम की लागत में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी

Atm in India being shut down at a quick pace, Atm industry in big loss
  • कम आमदनी के चलते कई एटीएम संचालक अपने-अपने एटीएम को बंद करने की तैयारी कर रहे हैं।
  • पिछले दो साल में देश में एटीएम की संख्या तेजी से गिरी है।
  • एटीएम की संख्या घटने से मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

नई दिल्ली।

एटीएम इंडस्ट्री की लागत बढ़ने से सैकड़ों एटीएम पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों के मुताबिक सरकार ने हाल ही में एटीएम से जुड़े नियम को सख्त कर दिया है, जिससे एटीएम के रखरखाव की लागत में पिछले एक साल में 40 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। लेकिन उसके मुकाबले उनकी आमदनी में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में, कई एटीएम संचालक अपने-अपने एटीएम को बंद करने की तैयारी कर रहे हैं।

 

बढ़ गई एटीएम मेंटेनेंस की लागत

कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री के महानिदेशक ललित सिन्हा ने मनी भास्कर को बताया कि देश में अभी लगभग 2.20 लाख एटीएम है। इनमें से 18 हजार व्हाइट लेवल एटीएम है जिसे पूर्ण रूप से निजी कारोबारी चलाते हैं। वहीं 50,000 एटीएम ब्राउन लेवल एटीएम कहलाते हैं जिसमें बैंक की तरफ से ट्रांजेक्शन का काम किया जाता है, अन्य काम की जिम्मेदारी निजी संचालकों की होती है। बाकी के एटीएम बैंक द्वारा संचालित है। सिन्हा ने बताया कि कुछ माह पहले एटीएम के रखरखाव एवं एटीएम में ट्रांजेक्शन के नियमों को आरबीआई एवं गृह मंत्रालय ने सख्त कर दिया था। इससे एटीएम के रखरखाव की लागत में पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। ऐसे में, यह कारोबार अब व्यावहारिक नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि निजी रूप से एटीएम चलाने वालों को एटीएम से होने वाले ट्रांजेक्शन पर भुगतान किया जाता है। यह भुगतान प्रति ट्रांजेक्शन 7-12 रुपए तक है। पिछले कई सालों से इस फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ने से भी एटीएम से होने वाला ट्रांजेक्शन प्रभावित होने की उम्मीद की जा रही है।

 

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पहले से ही कम एटीएम हैं भारत में

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजे आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि पिछले दो साल में देश में एटीएम की संख्या तेजी से गिरी है। International Monetary Fund के मुताबिक ब्रिक्स (BRICS) देशों में भारत के पास प्रति लाख आबादी पर सबसे कम एटीएम हैं। रूस में प्रति लाख आबादी पर 164, ब्राजील में 107, चीन में 81, साउथ अफ्रीका में 68 और भारत में 22 एटीएम हैं। अब एटीएम के बंद होने से प्रति लाख आबादी पर एटीएम की संख्या और भी कम हो जाएगी।

 

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बैंक ब्रांचेज का घटना है बड़ी वजह

एटीएम की घटती संख्या के पीछे सरकारी बैंकों द्वारा ब्रांचों को कम करना भी बड़ी वजह है। 2018 के शुरुआती 6 महीनों में पांच असोसिएट बैंकों और एक लोकल बैंक को खरीदने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी 1000 ब्रांच बंद कर दीं। बैंक के हर दो एटीएम में से एक बैंक ब्रांच में इंस्टॉल होते हैं। SBI के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश कुमार के मुताबिक डिजिटाइजेशन के चलते बैंकों को ज्यादा ब्रांचेज से ऑपरेट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 

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डिजिटाइजेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

एटीएम की संख्या घटने से मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पिछले पांच सालों में ही मोबाइल बैंकिंग ट्रांजैक्शन 65 फीसदी बढ़ा है। देश की युवा आबादी ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल ऐप की तरफ शिफ्ट हो रही है। फेडरल बैंक लिमिटेड के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर आशुतोष खजूरिया के मुताबिक, एटीएम निश्चित रूप से घट रहे हैं। कोई भी व्यक्ति घाटे में जा रहे व्यापार में इन्वेस्ट नहीं करेगा।

 

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