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  • Around 40 lakh check refund cases pending in courts across the country

मांग /देश भर में चेक वापिसी के लगभग 40 लाख मुकदमे न्यायालयों में लंबित

  • कैट ने वित्त मंत्री एवं वाणिज्य मंत्री से इस मुद्दे पर तुरंत फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग की

Moneybhaskar.com

Feb 07,2020 04:16:54 PM IST

नई दिल्ली. कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल को पत्र भेजकर देश में चेक वापसी की संख्या में हो रही देरी पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। वित्त मंत्री एवं वाणिज्य मंत्री को भेजे पत्र में कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल एवं प्रदेश अध्यक्ष सुधाकर पंडा ने विधि आयोग की 213 वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि देश में लगभग 40 लाख चेक बाउंस के मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायालयों में लंबित मामलों में चेक बाउंस के मामले एक बड़ा हिस्सा है। कहा है कि सरकार द्वारा निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 पर गौर करने की तत्काल आवश्यकता है और चेक जारी करने की साख को बहाल करने के लिए सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उपरोक्त मामलों में कड़े प्रावधानों को रखने के लिए इस अधिनियम में संशोधन लाने के अलावा सुझाव दिया कि एक तात्कालिक उपाय के रूप में सरकार को प्रत्येक जिला स्तर पर फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करनी चाहिए ताकि चेक बाउंस मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जा सके।

समय पर मुकदमों के निपटारे के मौलिक अधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन है

उन्होंने आगे कहा कि यह ध्यान देने वाली बात है कि चेक वापिसी के मामलों के निपटारे में गुजरात में सबसे अधिक समय लगभग औसतन 3,608 दिन (10 साल से थोड़ा कम) लगता हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में सबसे कम औसत 967 दिन (लगभग दो साल और नौ महीने) लगते हैं जो सीधे तौर पर न्यायिक कहावत "न्याय में देरी -न्याय का खंडन" का एक जीवित उदाहरण है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के खिलाफ है। इन मामलों के निपटारे में हो रही देरी अदालतों की अक्षमता और समय पर मुकदमों के निपटारे के मौलिक अधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन है। इस कारण से देश में नकद के लेन-देन, भ्रष्टाचार, नकली नोट जैसी प्रवृतियों को बढ़ावा मिलता है। भरतिया और खंडेलवाल ने यह भी कहा कि उच्च न्यायपालिका और विधायिका दोनों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और कई मौकों पर धारा 138 के तहत मामलों के तेजी से निपटान के लिए तंत्र को लागू करने की आवश्यकता को दोहराया है। इन मामलों की व्यावसायिक प्रकृति को देखते हुए, चेक बाउंस मामलों के निपटान में देरी से व्यापार बुरी तरह प्रभावित होता है और व्यापार में अविश्वसनीयता की भावना अधिक प्रबल होती है। भारतीय संसद के अपने भाषण में, वर्ष 2017-2018 के लिए वार्षिक बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने चेक बाउंस मामलों के निवारण के लिए कम समय की आवश्यकता के बारे में जोरदार बात की थी मुकदमेबाजी की जटिलता पर टिप्पणी की करते हुए इस प्रक्रिया को आसान करने की बात भी कही थी। इस दृष्टि से अब इन मामलों के त्वरित निपटान में केंद्र सरकार को अविलम्ब कदम उठाना चाहिए।

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