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देश में रजिस्टर्ड 30 फीसदी कंपनियां बंद, 5 लाख पर गिरी गाज

लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार देश में रजिस्टर्ड कुल कंपनियों में से 30 फीसदी कंपनियां बंद हो गई हैं

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नई दिल्ली। मोदी सरकार की शेल कंपनियों पर की गई सख्ती का असर कंपनियों के बंद होने पर सीधे तौर पर दिखा है। लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार देश में रजिस्टर्ड कुल कंपनियों में से 30 फीसदी कंपनियां बंद हो गई हैं। देश में इस समय कुल 16.96 लाख कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। इसमें से 5.32 लाख कंपनियां बंद हो गईं हैं।
 
क्या कहते हैं आंकड़े   
कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय से मिले आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2017 तक देश में 16,96,792 कंपनियां रजिस्टर्ड थी। जिसमें से 5,32,063 कंपनियां बंद हो गई हैं। इसमें से 4.90 लाख कंपनियां ऐसी हैं, जो डिफंक यानी पूरी तरह से बंद हो गई हैं। जबकि बाकी कंपनियां मर्जर, एलएलपी में परिवर्तित होने जैसी वजहों से बंद हुई हैं।
कुल कंपनियां
1696792
कुल बंद कंपनियां
5,32,063
डिफंक या स्ट्राइक ऑफ
490453
विलय
19789
एलएलपी में परिवर्तित
6591
लिक्विडेशन में कंपनियां
5947
डॉरमेंट
1107
सेक्शन 248 के तहत बंद कंपनियां
30859
डिसॉल्वड कंपनियां
10437
 
ज्यादातर शेल कंपनियां बंद
बंद हुई कंपनियों में 90 फीसदी से ज्यादा कंपनियां शेल कंपनियां है। जो कि सरकार द्वारा की गई सख्ती की वजह से बंद हुई हैं। शेल कंपनियां ऐसी होती हैं, जो कि ब्लैकमनी के लिए प्रमुख रुप से बनाई जाती है।
 
नोटबंदी में किया था इन कंपनियों ने खेल
फाइनेंस मिनिस्ट्री से मिले आंकड़ों के अनुसार देश में नोटबंदी के समय शेल कंपनियों ने काफी ब्लैकमनी का हेर-फेर किया। नोटबंदी के दौरान 28 हजार से ज्यादा कंपनियों ने 49 हजार से ज्यादा बैंक अकाउंट के जरिए 10,200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हेरा-फेरी की थी। कई कंपनियों ने ब्लैकमनी ठिकाने लगाने के लिए 100 से ज्यादा अकाउंट खोल रखे थे। एक कंपनी के पास तो 2134 बैंक अकाउंट थे।
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