• Home
  • After Moody's, World Bank also reduced India's economic growth rate, estimated 6%

रिपोर्ट /मूडीज के बाद वर्ल्ड बैंक ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटाई, 6% का जताया अनुमान 

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक की संयुक्त वार्षिक बैठक से पहले जारी हुई रिपोर्ट
  • निजी खपत में गिरावट और उद्योग-सेवा क्षेत्र में कमजोर वृद्धि से रहेगी सुस्ती

Moneybhaskar.com

Oct 13,2019 05:29:27 PM IST

नई दिल्ली। वर्ल्ड बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर रविवार को छह प्रतिशत कर दिया। वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 6.9 फीसदी रही थी। हालांकि, दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस के ताजा संस्करण में वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि मुद्रास्फीति अनुकूल है और यदि मौद्रिक रुख नरम बना रहा तो वृद्धि दर धीरे-धीरे सुधर कर 2021 में 6.9 प्रतिशत और 2022 में 7.2 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है। आपको बता दें कि इससे पहले मूडीज इन्वेस्टर ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी ग्रोथ घटाकर 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।

लगातार दूसरे साल गिरावट का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक की संयुक्त वार्षिक बैठक से पहले जारी रिपोर्ट में लगातार दूसरे साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान व्यक्त किया गया है। वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर, वित्त वर्ष 2017-18 के 7.2 प्रतिशत से नीचे 6.8 प्रतिशत रही थी। विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों में वृद्धि के कारण औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गयी, जबकि कृषि और सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर क्रमशः 2.9 और 7.5 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 की पहली तिमाही में मांग के मामले में निजी खपत में गिरावट तथा उद्योग एवं सेवा दोनों में वृद्धि कमजोर होने से अर्थव्यवस्था में सुस्ती रही।

चालू खाता घाटा बढ़ा

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2018-19 में चालू खाता घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.1 प्रतिशत हो गया। एक साल पहले यह 1.8 प्रतिशत रहा था। इससे बिगड़ते व्यापार संतुलन का पता चलता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में आर्थिक गति तथा खाद्य पदार्थों की कम कीमत के कारण खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 3.4 प्रतिशत रही। यह रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से ठीक-ठाक कम है। इससे रिजर्व बैंक को जनवरी 2019 से अब तक रेपो दर में 1.35 प्रतिशत की कटौती करने तथा मौद्रिक परिदृश्य को बदल कर नरम करने में मदद मिली।

गरीबी में कमी जारी पर रफ्तार सुस्त पड़ी

वित्तीय मोर्चे पर पहली छमाही में पूंजी की निकासी हुई। हालांकि अक्टूबर 2018 के बाद रुख बदलने से पिछले वित्त वर्ष के अंत में विदेशी मुद्रा भंडार 411.90 अरब डॉलर रहा। इसी तरह, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति खराब रही। मार्च से लेकर अक्टूबर 2018 के बीच इसमें 12.1 प्रतिशत की गिरावट रही। हालांकि उसके बाद मार्च 2019 तक यह करीब सात प्रतिशत मजबूत हुआ। वर्ल्ड बैंक ने कहा कि गरीबी में कमी जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार सुस्त हो गयी है। वित्त वर्ष 2011-12 और 2015-16 के दौरान गरीबी की दर 21.6 प्रतिशत से कम होकर 13.4 प्रतिशत पर आ गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा शहरी क्षेत्रों में युवाओं की बेरोजगारी की ऊंची दर के साथ ही जीएसटी और नोटबंदी ने गरीब परिवारों की समस्याएं बढ़ा दी। हालांकि, प्रभावी कॉरपोरेट कर की दर में हालिया कटौती से कंपनियों को मध्यम अवधि में लाभ होगा लेकिन वित्तीय क्षेत्र में दिक्कतें सामने आती रहेंगी।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट चिंता का विषय


कमोडिटी रिसर्च फर्म एंजल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि ऐसे समय में यह रिपोर्ट जारी की है जब सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के कई प्रयास कर रही है। रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक की ओर से आर्थिक ग्रोथ का अनुमान घटाना चिंता का विषय है। सरकार को इस रिपोर्ट पर ध्यान देना चाहिए और रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों में सुधार के लिए कदम उठाने चाहिए। गुप्ता का कहना है कि इस समय हमारी अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था से काफी प्रभावित हो रही है। सरकार को इसको ध्यान में रखते हुए आर्थिक ग्रोथ के कदम उठाने चाहिए। उन्होंने अनुमान जताया कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए रुपए में गिरावट और कच्चे तेल में तेजी आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो आर्थिक ग्रोथ के लिए किए गए सारे सरकारी प्रयास बेकार हो जाएंगे।

X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.